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आखिर कैसे होगी बेटियों की अच्छी पढ़ाई...!

Sat, 28 Apr 2018 10:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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सिद्धार्थनगर के जीजीआईसी में बच्चों को पढ़ातीं प्रधानाचार्य। - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। बेटियों की अच्छी शिक्षा पर सरकार का पूरा जोर है, लेकिन इन विद्यालयों में संसाधन उपलब्ध कराने में कोई दिलचस्पी नहीं दिख रही। नजीर के तौर पर नगर का राजकीय कन्या इंटर कॉलेज है। यहां कक्षा-6 से 12 तक की दो सौ से अधिक बच्चियों की पढ़ाई के लिए प्रिसिंपल समेत सिर्फ तीन शिक्षिकाएं तैनात हैं। हालांकि पद 20 शिक्षकों का है। अंग्रेजी, गृह विज्ञान, हिंदी जैसे कई मुख्य विषयों का कोई शिक्षक नहीं है। नए शिक्षण सत्र से पूर्व दो शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने से स्थिति और बिगड़ गई है। शिक्षकों की कमी से यहां हर छात्राओं की संख्या में भी तेजी से कमी आ रही है।   जिले में तीन जीजीआईसी संचालित हो रहे हैं। इसमें तेतरी बाजार का विद्यालय भी शामिल है। विद्यालय के स्थापना काल के बाद से ही व्यवस्थाएं बदतर होती जा रही है।
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विद्यालय शुरू होने के दौरान जिन शिक्षकों की तैनाती हुई थी। इसमें कुछ तो ट्रांसफर कराकर अन्यत्र चले गए तो कुछ सेवानिवृत हो गए। आज स्थिति यह है कि 20 के सापेक्ष मात्र तीन शिक्षक बचे हैं, जिनके भरोसे पढ़ाई चल रही है। इस समय विद्यालय में कक्षा छह से इंटरमीडिएट तक 205 छात्राएं पंजीकृत हैं। हाईस्कूल स्तर पर तक दो शिक्षिकाएं पढ़ाती हैं, जबकि इंटर स्तर शिक्षिका के रूप में प्रधानाचार्य हैं। वह इंटर स्तर की छात्राओं को पढ़ाती हैं। विद्यालयों में शिक्षण कार्य राम भरोसे चल रही है। इसलिए हर वर्ष छात्राओं के नामाकंन में कमी आ रही है। जबकि सरकार सरकारी विद्यालयों में सुधार लाने के लिए अधिक से अधिक बच्चों के नामांकन कराने पर जोर दे रही है।       
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