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न्यायिक कार्य से विरत रहे अधिवक्ता, किया प्रदर्शन

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जिला अस्पताल के इमरजेंसी के बाहर प्रदर्शन करते अधिवक्ता। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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न्यायिक कार्य से विरत रहे अधिवक्ता, किया प्रदर्शन
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- जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया
- साथी अधिवक्ता की मौत के मामले की जांचकर कार्रवाई की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाकर अधिवक्ताओं ने बृहस्पतिवार को प्रदर्शन किया। न्यायिक कार्य से विरत रहकर विरोध जताया। जनपद न्यायालय से अस्पताल तक मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। अस्पताल गेट पर प्रदर्शन करते हुए अधिवक्ताओं ने एसडीएम नौगढ़ प्रदीप यादव को पांच बिंदुओं संबंधी ज्ञापन दिया।
सिविल सिद्धार्थ बार एसोसिएशन अध्यक्ष अंजनी कुमार दुबे व महामंत्री दिव्य प्रकाश शुक्ल के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने जनपद न्यायालय परिसर से नारेबाजी करते हुए अस्पताल पहुंचे। उन्होंने जिला प्रशासन, अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के विरोध में नारेबाजी करते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की मांग की।
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बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अखंड प्रताप सिंह, पूर्व महामंत्री कृपाशंकर त्रिपाठी व अधिवक्ता शेषमणि प्रजापति ने कहा कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों की तरफ से बाहर की दवाएं लिखी जाती है। इलाज के बजाए व्यवसाय किया जा रहा है।
इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक अक्सर नदारत रहते हैं। अधिवक्ता देवेंद्र नाथ त्रिपाठी, रामेश्वर पांडेय व रम्मी श्रीवास्तव ने कहा कि मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के इमरजेंसी में लगे सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर प्रभावहीन कर दिया गया है।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि बिना किसी इलाज के ही चिकित्सक गंभीर मरीज को गोरखपुर रेफर कर देते हैं, जिससे रास्ते में ही अधिकांश की मौत हो जाती है। अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री एवं डीएम को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपकर समस्याओं के निदान की मांग की। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश पांडेय, राकेश सिंह, सच्चिदानंद झा, मनीष सहाय, अजय पांडेय, अंकित चौधरी, हरिशंकर शुक्ल, शादाब अहमद, रियाज अहमद, चंद्रकांत दुबे मौजूद रहे।
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यह है मामला
युवा अधिवक्ता उमाशंकर गौड़ के बीमार होने पर 16 अगस्त रात को जिला अस्पताल के इमरजेंसी में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अधिवक्ताओं का आरोप है कि इलाज में लापरवाही के कारण अधिवक्ता उमाशंकर गौड़ की मौत हुई, इससे पूर्व भी एक अधिवक्ता की इलाज में लापरवाही पर मौत हो चुकी है। उन्होंने समिति बनाकर घटना की जांच करने और 16 अगस्त रात को इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
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