सिद्धार्थनगर। नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने लगा। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल हो गया। अलर्ट बजा तो कुछ ही पलों में पूरा प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। एनडीआरएफ की टीम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अन्य आपदा प्रबंधन इकाइयां सक्रिय हुईं और बचाव कार्य में जुट गईं।
तहसील बांसी के रानी मोहभक्त लक्ष्मी घाट पर यह नजारा देखने को मिला। बाढ़ जैसी आपदा से निपटने की तैयारियों को परखने के लिए बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिलाधिकारी/इंसीडेट कमांडर शिवशरणप्पा जीएन के नेतृत्व में व्यापक मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। इसमें एनडीआरएफ गोरखपुर की टीम समेत पूरा जिला प्रशासन एक्शन मोड में नजर आया।
जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, पीएससी, अग्निशमन विभाग, राजस्व, सिंचाई, नगर निकाय, बिजली निगम सहित तमाम इकाइयों ने संयुक्त रूप से राहत और बचाव कार्यों में जुटे नजर आए। आपदा मित्रों और स्थानीय स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी ने अभ्यास को और भी वास्तविक बना दिया।
मॉकड्रिल की शुरुआत उस समय हुई जब काल्पनिक सूचना के तहत नदी में बाढ़ आने की स्थिति दिखाई गई और इसकी जानकारी तुरंत जिला कंट्रोल रूम को दी गई। इसके बाद महज 50 मिनट के भीतर एनडीआरएफ और जिला आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंच गईं, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन की गति और समन्वय की बारीकी का परीक्षण हुआ।
इस दौरान बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, डूबे व्यक्ति को निकालने और तत्काल प्राथमिक उपचार देने का प्रदर्शन किया गया।
स्वास्थ्य विभाग ने फर्स्ट एड और इमरजेंसी मेडिकल रिस्पॉन्स का अभ्यास कराया। वहीं, जल निगम और स्थानीय निकायों ने सुरक्षित पेयजल आपूर्ति के लिए इंडिया मार्का-2 हैंडपंप व्यवस्था का मॉडल प्रस्तुत किया। पशुपालन विभाग ने व्यवस्था की कार्ययोजना बताई।