डुमरियागंज क्षेत्र के हल्लौर स्थित बड़े इमामबाड़े में आयोजित जश्ने अबू तालिब में कलाम पेश करते लक
डुमरियागंज। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद के चाचा और इमाम अली के पिता हजरत अबू तालिब की पैदाइश शनिवार को शिया बहुल कस्बा हल्लौर में धूमधाम के साथ मनाई गई। इस दौरान महफिल मिलाद का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने कलाम कशीदा पढ़ा तथा धार्मिक विद्वानों ने अबू तालिब की जिंदगी और किरदार शख्सियत पर विस्तार से रोशनी डाली।
हजरत अबू तालिब की पैदाइश को लेकर महफिल मिलाद के आयोजन का सिलसिला शुक्रवार की रात से ही हल्लौर कस्बा में शुरू हो गया था। बड़े इमामबाड़ा पर मोमनीन हल्लौर की ओर से आयोजित जश्न-ए-अबू तालिब का आगाज शकील अहमद गुड्डू ने कलाम पाक की तिलावत करके किया। जिसके बाद नाते पाक खुलुस हल्लौरी और शादाब संजू ने पेश किया। महफिल में नफीस, अम्मार, हसन जमाल, आलम हल्लौरी आले रजा, हनी, अरमान आरजू, आजादार हुसैन, फैजी, लकी हल्लौरी, हैदरे कर्रार, मोजिज, साबिर, कौसर आदि ने हजरत अबू तालिब की शान में कलाम कसीदा पेश किया। महफिल के अंत में जाकिर जमाल हैदर और काजिम करबलाई ने अपने संबोधन के जरिए कहा कि हजरत अबू तालिब पैगंबर हजरत मोहम्मद के चाचा और इमाम अली के पिता थे। उन्होंने ही हजरत मोहम्मद साहब की परवरिश की। हजरत अबू तालिब दीन इस्लाम की जान और शान तथा पहचान है। इस्लाम को हजरत अबू तालिब के घर से ही पहचान और जिंदगी मिली। उन्होंने लोगों से हजरत अबू तालिब की जिंदगी और किरदार से प्रेरणा लेकर हक, सच्चाई और इंसाफ, नेकी के रास्ते पर चलने की अपील की। जश्ने अबू तालिब को लेकर बड़े इमामबाड़े की भव्य रूप से सजावट की गई थी। कार्यक्रम के आयोजन में वजीर हैदर, जानशीन हैदर, फहीम हैदर, कलीम हैदर आदि मौजूद रहे।