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आधार फर्जीवाड़ा : हजार की आईडी, लाखों में कमाई

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संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। आधार फर्जीवाड़ा का कनेक्शन बलरामपुर से जुड़ रहा है। क्योंकि पकड़े गए आरोपी लिंक और आधार में गड़बड़ी करने का काम करते थे। पूर्व में बलरापुर में बड़ा रैकेट पकड़ा गया था, जिसमें इटवा क्षेत्र के पांच लोग शामिल थे। जो आधार से लेकर जन्म प्रमाणपत्र के बनाने का कार्य करते थे।
लिंक और अन्य इलेक्ट्राॅनिक सामान वहीं से मुहैया हुआ था। ऐसे में लिंक देने वाले आरोपियों की धरपकड़ होने पर बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि, लिंक का हजार से 10 हजार रुपये तक में बेचते हैं, जिससे फर्जीवाड़े का खेल शुरु होता है। जनपद में नेपाल बाॅर्डर के कोटिया में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में यह बात सामने आई थी, कि उसने भी दिल्ली में रहने वाले भाई जरिये ही लिंक खरीदा था। फिलहाल इटवा पुलिस ने इस मामले में दो वांछित गिरफ्तार किए हैं, मामले की जांच की जा रही है।
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जन्म प्रमाण पत्र से लेकर आधार कार्ड तक करते थे जारी : बीते वर्ष सीमावर्ती क्षेत्र के कोटिया में दो संदिग्ध पकड़े गए। जनसेवा केंद्र की आड़ में फर्जी जन्म प्रमाणपत्र, आधार और संशोधन आदि करने का काम करते थे। इनके कब्जे से कई इलेक्ट्राॅनिक सामान, कई वेबसाइड आदि मिली थी।
पकड़े गए आरोपियों में एक ने बताया था कि जन्म प्रमाणपत्र जारी करने वाला लिंक उसे उसके भाई के जरिये दिल्ली से मिला था। इसकी एवज में रुपये भी लगे थे। वहीं, फरवरी में बलरामपुर में पकड़े गए 11 सदस्यों के गिरोह में अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर सहित कई प्रमाणपत्र बनाने के लिंक आदि मिले थे। जनपद में बड़े पैमाने पर हेराफेरी करने के मामले से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
पकड़े गए थे यह आरोपी : इटवा पुलिस ने दो लोग माता प्रसाद जायसवाल इंटर काॅलेज गेट के निकट स्थित शिव मंदिर के पास से दोनों आरोपियों को पकड़ा था। पूछताछ में एक ने अपना नाम फिरोज आलम निवासी सहरसपाली, कोतवाली व जनपद बलिया एवं दूसरे ने शिव बालक पुत्र तुलसीराम निवासी अमौना थाना इटवा जनपद सिद्धार्थनगर बताया।
पूछताछ में फिरोज आलम ने बताया कि परवेश यादव निवासी जैतापुर थाना गौरा चौराहा जनपद बलरामपुर ने मो. जावेद की यूआईडी लाॅगिन कर लैपटाप, फिंगर प्रिंट ,स्कैनर आईरिश स्कैनर दिया है। इसी से हम दोनों मिलकर ऐसे आवेदक जिनकी उम्र 18 वर्ष या इससे अधिक होती है।
उनकी जन्मतिथि 18 वर्ष से कम दिखाकर उनका आधार कार्ड बना देते हैं और बाद में उनकी जन्मतिथि संशोधित कर दी जाती है। एनीडेक्स साफ्टवेयर के माध्यम से मो. जावेद के आईडी पर हम लोग इसी दुकान पर पूरे दिन आधार कार्ड बनाने व संशोधन करने का यह कार्य करते हैं।
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यदि जांच की जाए तो इनके आधार कार्ड बनवाने में शामिल लोगों में रोहिंग्या या बांग्लादेशी भी शामिल हो सकते हैं। अब पुलिस इन आरोपियों को पकड़ने में लगी है, जिससे नेटवर्क को ताेड़ा जा सके।
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