बांसी। रतन सेन डिग्री कॉलेज में फाइलेरिया जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई।
कार्यक्रम में फाइलेरिया की जानकारी देते हुए स्वामी विवेकानंद इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सुभीर सिंह ने बताया कि फाइलेरिया के लक्षण और निदान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि यदि किसी को फाइलेरिया हो जाए तो उसे खान-पान और दवाओं के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
रानी लक्ष्मीबाई इकाई की कार्यक्रम अधिकारी सुष्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि फाइलेरिया एक परजीवी (पैरासाइट) रोग है जो निमेटोड कीड़े द्वारा संक्रमित मच्छरों के काटने से होता है। यह रोग विश्वभर में विकलांगता और शारीरिक विकृति बढ़ाने वाले प्रमुख रोगों में से एक है। फाइलेरिया मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है। इसके लक्षणों में पैरों और बाहों में सूजन, सिरदर्द, बुखार आदि शामिल हैं।
बचाव के उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि सभी को समय पर फाइलेरिया की दवा लेनी चाहिए। अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखना चाहिए, घरों के आसपास पानी इकट्ठा नहीं होने देना चाहिए, पूरी बांह के कपड़े पहनने चाहिए तथा सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही दैनिक जीवन में आंवला, अश्वगंधा, अदरक, लौंग आदि का उपयोग भी लाभकारी बताया। इसके उपरांत शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की टोली ने नरकटहा में फाइलेरिया जागरूकता अभियान के अंतर्गत आसपास के लोगों को जागरूक किया।
इस अभियान में कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विनोद यादव, सूर्यकांत त्रिपाठी, प्रवेश दुबे, राजेश कुमार शर्मा, राजेश सिंह, ध्रुवपति यादव आदि शामिल रहे।