फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Siddharthnagar News: आपदा की जमीन पर राहत लेकर उतरेगा हेलिकॉप्टर

Thu, 11 Jun 2026 11:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। अब बाढ़ और अन्य बड़ी आपदा के समय बचाव के लिए सेना के हेिलकॉप्टर लैंडिंग के लिए जगह नहीं तलाशनी पड़ेगी। हेलिकॉप्टर की आपात लैंडिंग के लिए चार ब्लॉक मुख्यालयों में बढ़नी, खुनियांव, भनवापुर और शामिल हैं। ढाई करोड़ की लागत से स्थाई हेलीपैड बनाए जाएंगे।
विज्ञापन

इससे बाढ़ के दौरान रेस्क्यू और सामग्री पहुंचाने में सेना को परेशानी नहीं होगी। आपदाओं में राहत सामग्री लेकर सेना का हेलिकॉप्टर आसानी से उतरेगा और हर पीड़ित तक आसानी से मदद पहुंच जाएगी।
नेपाल बाॅर्डर से लगा होने के कारण प्रदेश के तराई इलाकों में जनपद की गणना होती है। नेपाल में होने वाले मौसम के बदलाव का असर यहां पर भी पड़ता है। नेपाल में भारी बारिश के दूसरे ही दिन या फिर 36 घंटे के भीतर जनपद में नदियां भी उफान पर होती हैं।
विज्ञापन

वहां लगातार कई दिन तक भारी बारिश, यहां बाढ़ के हालात उत्पन्न कर देती है। ऐसे में बाढ़ की चपेट में आए लोगों की मदद के लिए सेना की मदद ली जाती है। मगर सबसे बड़ी समस्या यह है कि लैंडिंग के लिए कोई जगह न होने की वजह से या तो पुलिस लाइंस या दूर सूखे मैदान में हेलिकॉप्टर को उतारना पड़ता है। कई बार हवा में लटक कर सेना के जवान लोगों तक राहत सामग्री और मदद पहुंचाते हैं।
ऐसे में ब्लॉक मुख्यालय के सुरक्षित स्थान पर हेलीपैड बनाए जाने की तैयारी की गई है। इनके बनने के बाद न सिर्फ रेस्क्यू ऑपरेशन और मदद में आसानी होगी बल्कि पीड़ितों को जल्द से जल्द राहत मिलेगी। शासन की ओर से आपाद को देखते हुए जिले के चार ब्लॉक में हेलीपैड बनाने के लिए वित्तीय स्वीकृति मिली है। एक हेलीपैड निर्माण के पर 80 लाख रुपये खर्च होंगे। इसमें बढ़नी, खुनियांव और भनवापुर ब्लॉक का फाइनल हो गया जबकि इटवा प्रक्रिया में है जो जल्द ही फाइनल होने की उम्मीद है।
जिले में छह बड़ी नदी और नालों के अलावा छोटे-छोटे नाले हैं जो बारिश के बाद उफान पर आ जाते हैं। शायद ही कोई साल बचे जब बाढ़ की स्थिति नहीं आती है। नदियों और नालों से घिरे इस जनपद में एक हजार किलोमीटर नदी और नालों का दायरा है। जब बाढ़ आती है तो शायद ही कोई इलाका बचता है जो अछूता रहता है। ऐसे में बचाव के लिए एनडीआएफ, एसडीएफ और लोकल नाव के साथ ही सेना की जरूरत पड़ती है। रेस्क्यू के लिए हेिलकॉप्टर की जरूरत पड़ती है।
विज्ञापन

जनपद मुख्यालय पर केवल पुलिस लाइन में ही हेलीपैड था, जहां से पूरे जनपद में प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और रेस्क्यू में देरी होती है। संवाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें