-दल में नेपाल, भारत और चीन के लगभग 250 साइकिल चालक भाग ले रहे
-बुद्ध से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत स्थलों की जानकारी जुटाने के लिए बुद्ध ज्ञान साइकिल यात्रा शुरू की गई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नेपाल के रूपनदेही जिले के भैरहवा बुद्ध चौक से शुरू हुई बुद्ध ज्ञान साइकिल यात्रा का शनिवार को कपिलवस्तु में स्वागत किया गया। कपिलवस्तु की टीम ने जगदीशपुर झील, बुद्ध स्थल तिलौराकोट, गोटीहवा और कूदान का दौरा किया। इस वर्ष बुद्ध से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत स्थलों की जानकारी जुटाने के लिए बुद्ध ज्ञान साइकिल यात्रा शुरू की गई है।
यात्रा में शामिल दल शुक्रवार को कपिलवस्तु के जगदीशपुर पहुंचा। शनिवार सुबह बुद्ध स्थल तिलौराकोट पहुंची टीम का कपिलवस्तु नगर पालिका प्रमुख सुदीप पौडेल, कपिलवस्तु नगर पालिका तीन के अध्यक्ष प्रकाश गायरे, जिला खेल विकास समिति के अध्यक्ष राजेश उपाध्याय और कपिलवस्तु जिला साइकिलिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष नसरुद्दीन गौरी ने स्वागत किया। यात्रा में नेपाल, भारत और चीन के लगभग 250 साइकिल चालक भाग ले रहे हैं। शुक्रवार को नवलपरासी से कपिलवस्तु आई टीम का प्रबंधन कपिलवस्तु नगर पालिका ने बिस्वा वेटलैंड के जगदीशपुर झील क्षेत्र का दौरा किया है। साइकिल चालकों ने कहा कि जब वे लुंबिनी सहित बुद्ध के जीवन से जुड़े कपिलवस्तु, रूपनदेही और नवलपरासी के बुद्ध स्थलों तक साइकिल से गए तो उन्हें विशेष खुशी महसूस हुई।
दल में शामिल बरेली के साइकिल चालक संदीप जिंदल जिन्हें साइकिल बाबा के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इससे पहले नेपालगंज में 5 में से 4 साइकिल यात्राओं में भाग लिया। साइकिल यात्रा पर बुद्ध स्थलों पर आकर विशिष्ट ज्ञान एवं आनंद की अनुभूति होती है। मुझे नेपाल आना अच्छा लगता है, हर कोई मुझसे कहता है कि नेपाल आपका दूसरा घर है। साइकिल चालक सम्राट सपकोटा ने कहा कि साइकिल यात्रा के कारण उन्हें कपिलवस्तु के कई बौद्ध स्थलों से परिचित होने का मौका मिला।
जम्मू-कश्मीर की साइकिल चालक डॉक्टर रितु ने बताया कि उन्होंने पिछले साल साइकिल से ठाकुरधारा तक यात्रा की थी, यह उनका दूसरा चक्र था। यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मैं साइकिल से लुंबिनी जा रही हूं, जहां बुद्ध का जन्म हुआ था। तिलौराकोट पैलेस आदि जैसे महत्वपूर्ण बौद्ध स्थानों की यात्रा कर पा रहा हूं। मुझे नेपाली लोगों का आतिथ्य और व्यवहार बहुत पसंद आया। यह पाया कि साइकिल यात्रा में बच्चों और दिव्यांगों ने भी हिस्सा लिया है।
भैरहवा के 11 वर्षीय साइकिल चालक अश्विनी खरेल ने कहा कि जब वह समूह में साइकिल से यात्रा कर रहीं थीं और बुद्ध स्थल के बारे में जानकारी ले रही थीं तो उसे खुशी हो रही थी। काठमांडू के दिव्यांग साइकिल चालक पुरुषोत्तम साहूखाल ने बताया कि उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों में साइकिल यात्रा में भाग लिया है, और यहां तक की साइकिल यात्रा में भाग लेने के लिए कपिलवस्तु भी आए। अब साइकिल से सफर करने की आदत खत्म हो गई है। साइकिल से यात्रा करते समय कोई असुविधा नहीं हुई, उसने कहा।
यात्रा में भाग लेने वाले नेपालगंज साइकिलंग क्लब के अध्यक्ष प्रदीप सपकोटा ने कहा कि वे नेपालगंज में पांच वर्षों से टूर द ठाकुर के माध्यम से कार्यक्रम चला रहे हैं, और इससे आंतरिक पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। साइकिल सिटी भैरहवा के अध्यक्ष सूर्य कुमार सरू मगर ने बताया कि अंधेरे में डूबे बुद्ध स्थलों को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष से बुद्ध ज्ञान साइकिल यात्रा शुरू की गयी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइकिल यात्रा भैरवा के बुद्ध चौक से रामग्राम, भवानीपुर, जगदीशपुर, तिलौराकोट, गोतिहवा, कूदन, लुंबिनी होते हुए भैरवा तक पूरी होगी। हम इस यात्रा को जारी रखते हुए अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग करने की योजना बना रहे हैं। बौद्ध ज्ञान साइकिल यात्रा देश विदेश में उपेक्षित पुरातात्विक स्थलों के प्रति जागरूकता फैलाने में सहायक होगी।
जिला खेल विकास समिति कपिलवस्तु के अध्यक्ष राजेश उपाध्याय ने कहा कि साइकिल यात्रा के माध्यम से बुद्ध स्थल पर पर्यटन को बढ़ावा देने से पर्यटन को खेल से जोड़ा गया है। कपिलवस्तु नगर पालिका के प्रमुख सुदीप पौडेल ने कहा कि कपिलवस्तु अपने आपमें एक खुला संग्रहालय है। यह कपिलवस्तु में तिलौराकोट, निगलिहवा, गोतिहवा, कूदन, सगराहवा, जगदीशपुर झीलों को बढ़ावा देने में भूमिका निभाएगा और पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद करेगा।
उन्होंने बताया कि शुक्रवार को साइकिल यात्रा पर आये साइकिल चालकों के प्रबंधन में नगर पालिका ने सहयोग किया।