बहन से मिलने जा रहे भाई की टेंपो पलटने से मौत
ढेबरुआ क्षेत्र के रेहरा गांव के पास देर रात हुआ हादसा
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर/कठेला। ढेबरुआ क्षेत्र के इटवा-बढ़नी मार्ग पर स्थित रेहरा गांव के पास शनिवार रात बाइक व साइकिल को बचाने की कोशिश में टेंपो पलट गया। हादसे में टेंपो में सवार 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मरने वाला शख्स उसका क्षेत्र के रानीगंज का निवासी बताया जा रहा है।
क्षेत्र के रानीगंज निवासी प्रकाश (45) पुत्र झिनकान के बहन की शादी ढेबरुआ क्षेत्र के कठेला के टौला अहिरौली में हुई है। बताया जा रहा है कि शनिवार को वह उसका रेलवे स्टेशन से ट्रेन से बढ़नी पहुंचा। वहां से झकहिया चौराहे से टेंपो से ढेबरुआ क्षेत्र के कठेला गांव के टोला अहिरौला के लिए निकला। अभी वह इटवा-बढ़नी मार्ग पर स्थित रेहरा गांव के पास पहुंचा था कि सामने से आई रही साइकिल व बाइक को बचाने की कोशिश में टेंपो पलट गया। हादसे में प्रकाश गंभीर रूप से जख्मी हो गया। आसपास के लोगों ने उसे इटवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रभारी थाना निरीक्षक ढेबरुआ राजेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
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बुढ़ापे में छिन गया ‘प्रकाश’, बुझ गया चिराग
बूढ़ी मां का रो-रोकर बुरा हाल
श्याम सुंदर तिवारी
सिद्धार्थनगर। शादी के बाद से ही गरीबी ने पीछा नहीं छोड़ा। बाद में सहारा देने वाले पति की मौत हो गई। किसी तरह से चार बेटियों का हाथ पीला किया। एक बेटा जो बुढ़ापे का सहारा था, अब भगवान ने उसे भी छीन लिया। हर तरफ अंधेरा ही अंधेरा दिखा रहा है। इस बुढ़ापे में मेरी देखभाल कौन करेगा। अब कौन मां कहकर पुकरेगा। यह कहते हुए सड़क हादसे में जान गंवा चुके प्रकाश की बूढ़ी मां फूट-फूट कर रोने लगती है। लोगों ने बताया कि प्रकाश के पास अपना कोई आशियाना नहीं था और न ही खेती की कोई भूमि है। किसी तरह मजदूरी करके पिता ने गरीबी काटी। गरीबी झेलते हुए आखिर पिता भी चल बसे। इसके बाद सारी जिम्मेदारी प्रकाश के कंधे पर आ गई थी। वह मोची का काम करके किसी तरह परिवार का गुजर बसर करता था। चारों बहनों के यहां घूम-घूम कर रहता था। साथ ही मां की देखरेख करता था। अधिकांश समय वह चिल्हिया क्षेत्र के कंदवा में रहने वाली अपनी बहन के यहां बिताता था। लेकिन मां का हालचाल जानने के लिए वह उसके पास जाता था। शादी के कुछ दिनों बाद ही पत्नी भी छोड़कर चली गई। इसके बाद से प्रकाश अकेला हो गया। मगर शनिवार रात हुए हादसे ने बूढ़ी मां के प्रकाश को हमेशा के लिए बुझा दिया। पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंची बूढ़ी मां फूट-फूट कर बेटे के लिए रो रही थी। उसे अपने सहारे का चिंता थी कि अब उसकी देखभाल कौन करेगा। रोता देखकर हर किसी की आंखें नम थी।