बांसी। अपनों से मिलने की ललक और पूर्वजों की धरती को नमन करने की इच्छा सोनिया मंजू को सात समंदर पार भारत खींच लाई। वह त्रिनिदाद एंड टोबागो से गोल्हौरा क्षेत्र के दुबायल पांडेय पहुंची हैं। यहां लोगोें ने उनका जोरदार स्वागत किया।
त्रिनिदाद में वैज्ञानिक पद पर कार्य कर चुकीं 60 वर्षीय सोनिया मंजू की नानी दुबायल पांडये की रहने वाली थीं। उन्होंने बताया कि करीब डेढ़ सौ साल पहले दुबायल पांडेय निवासी कुटई की बेटी जगिया त्रिनिदाद में गिरमिटिया मजदूर के रूप में पहुंची थीं। वहां उन्होंने भारतीय मूल के ही लक्ष्मण नामक व्यक्ति से शादी की। उनके यहां एक बेटी भाग्यमनी का जन्म हुआ। उसकी शादी के बाद सोनिया मंजू पैदा हुईं। इनका पालन-पोषण नानी जगिया के यहां ही हुआ। उन्होंने सोनिया को पढ़ाई के लिए मुंबई भेजा। पढ़ाई खत्म करने के बाद सोनिया ने त्रिनिदाद में ही वैज्ञानिक के रूप में कार्य किया। वह बताती हैं कि नानी जगिया हिंदुस्तान में जन्मभूमि की बातें और यहां की संस्कृति से अक्सर अवगत कराती थीं। इससे यहां की जानकारी लेने के लिए उनके मन में हमेशा उत्सुकता रही। नानी के देहांत के बाद सोनिया ने इंडी रूट फाउंडेशन दिल्ली के प्रमुख मानवेंद्रनाथ तिवारी से संपर्क किया। मानवेन्द्र के अथक प्रयास से वे दुबायल पांडेय पहुंचीं।
साथ में आए मानवेंद्र ने बताया कि डेढ़ सौ वर्ष पूर्व जब जगिया यहां से गई थीं, उस वक्त गांव में उनके दो भाई शिवदीहल व दत्तू थे। उनके पोते राजाराम व रामकृपाल हैं। यहां उनके परिवार से मिलने सोनिया पहुंची हैं। दुबायल पांडेय में लोगों ने इन लोगों का भव्य स्वागत किया। इसके बाद ये लोग अपने पूर्वजों की देवी समय माता के स्थान पर गए और पूजा-अर्चना की। अपनी नानी के वंशज रामकृपाल के घर पहुंची सोनिया भावुक हो गईं। उनके मुख से यही बार-बार निकलता रहा ‘आई लव माई इंडिया’। जबकि उनके साथ आईं स्वरूप ने टूटी-फूटी हिंदी में कहा ‘सच गांव में भारत बसता है जो दुनिया का दिल है।’