सिद्धार्थनगर। गेहूं की खेती कर रहे किसानों के आगे खरपतवार की समस्या खड़ी हो गई है। पहली सिंचाई के बाद खेतों में खरपतवार का प्रकोप सामने आ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय से इस पर काबू न पाया गया तो उत्पादन को धक्का लग सकता है। किसानों की यह मुश्किल कृषि रक्षा इकाई पहुंचकर सुलझ सकती है। विभाग ने किसानों को खरपतवार की मार से बचाने के लिए 13 हजार यूनिट खरपतवारनाशी दवा मंगाई है।
दरअसल, जिले के किसानों को गेहूं की पहली सिंचाई के बाद खरपतवार की दिक्कत से जूझना पड़ता है। इस बार भी किसानों के सामने यह दिक्कत आ रही है। जिले में गेहूं की फसल में खरपतवार की समस्या बड़े पैमाने पर सामने आ रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह का कहना है कि इस पर अगर किसानों ने गंभीरता नहीं दिखाई तो उत्पादन पर चपत लगनी तय है। गेहूं की फसल में गेहूं का मामा और चौड़ी पत्ती किसानों के लिए मुश्किलों का सबब बन रही है। इसके सफाए के लिए खरपतवारनाशी दवाओं का उपयोग किया जाना चाहिए। सल्फर-सल्फोरान और टोटल नामक दवाएं कृषि रक्षा इकाइयों से खरीदी जा सकती है। इनके एक यूनिट को 120 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ रकबे में इस्तेमाल किया जा सकता है।
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पर्याप्त मात्रा में मौजूद हैं दवाएं
जिला कृषि रक्षा अधिकारी एसएन चौधरी ने बताया कि गेहूं की फसल को खरपतवार की मार से बचाने के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाएं कृषि रक्षा इकाइयों पर मौजूद हैं। सल्फर-सल्फरोन की एक यूनिट सब्सिडी के बाद 136 रुपये में और टोटल एक यूनिट 227 रुपये में किसानों के लिए उपलब्ध है। अगर किसी रक्षा इकाई पर किसानों से अधिक दाम लिए जाने की शिकायत मिली तो जिम्मेदारों पर कठोर कार्रवाई होगी।