सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल सीमा की संवेदनशीलता में अचानक से इजाफा होता नजर आ रहा है। मुंबई मकोका कोर्ट से अहमदाबाद और सूरत बम धमाकों के आरोपी इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी अफजल उस्मानी की फरारी समेत नेपाल में चुनावों को लेकर जारी माओवादियों का विरोध इसे पुलिस और खुफिया एजेंसियों के रडार पर वापस ले आई है। जिले में पहुंचकर सीधे सीमा क्षेत्र के थाने का डीआईजी ने निरीक्षण कर इसका ही संकेत दिया है।
सीमा पर तैनात एसएसबी को पिछले हफ्ते ही आलाधिकारियों की ओर से चौकसी बढ़ा देने का निर्देश दिया गया। एसएसबी कमांडेंट अमित शर्मा ने तब बताया था कि मऊ के आईएम आतंकी अफजल उस्मानी को लेकर लखनऊ में हुई उच्चस्तरीय बैठक में निर्देश मिले थे। दूसरी ओर सीमा पार भी सुरक्षा एजेंसियां आतंकी की तलाश में सक्रिय हो उठी हैं। इसी कड़ी में भारतीय खुफिया एजेंसियों के लिए नया सिरदर्द वहां का राजनीतिक माहौल भी है। वहां एनेकपा और नेकपा के बीच संविधान सभा चुनाव को लेकर बन रहे टकराव के माहौल ने सरहदीय क्षेत्र में एक बार फिर आतंक की स्थिति बनानी शुरू कर दी है। सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोग चुनाव के खूनी रंग को महसूस करके डरे हुए हैं। इस स्थिति से भारतीय खुफिया एजेंसियां भी अंजान नहीं हैं। इस लिहाज से भारतीय क्षेत्र में नेकपा कार्यकर्ताओं की दखल रोकने के लिए वो जुट गई हैं। सूत्रों की माने तो इसे लेकर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया गया है।
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डीआईजी ने दिए जरूरी निर्देश
सीमा क्षेत्र के थाने ढेबरुआ के निरीक्षण के दौरान रविवार को डीआईजी ने मुंबई मकोका कोर्ट में पेशी पर ले जाने के दौरान फरार हुए आतंकी का नाम लेकर मातहतों को आवश्यक निर्देश दिए। थाने पर असलहों की स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई। वह इसके बाद बढ़नी चौकी का निरीक्षण करने पहुंचे। यहां उन्होंने सिपाहियों की कम तैनाती पर भी सवाल किए। बोले सीमा क्षेत्र के थाने और चौकियों पर पर्याप्त फोर्स तैनात की जाएगी। उन्होंने जवानों को सतर्क करते हुए संदिग्धों की गंभीरता से पड़ताल करने का आदेश दिया। इस दौरान उनके साथ एसपी श्रीपर्णा गांगुली, सीओ अर्चना सिंह, रचना मिश्रा आदि मौजूद रहीं।