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लोभ और प्रतिशोध से जा रही जानें

Mon, 30 Sep 2013 05:37 AM IST
Siddhartha nagar
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डुमरियागंज। कहीं जुनून के कारण कहीं धन के लोभ में फंसकर तो कहीं प्रतिशोध की धधकती ज्वाला में अपनों का ही कत्ल कर देना अब आम बात हो गई है। बदलते सामाजिक ढांचे में लोग अपनी जीवन संगिनी को मौत के घाट उतारने में नहीं हिचक रहे हैं। इतना ही नहीं मामूली विवाद को लेकर लोग अपनी जान देने में भी आगे हो गए हैं। अब सवाल यह उठता है कि घरों के अंदर लोगों के दिलों में चल रही इन साजिशों पर आखिर कैसे पुलिस पहरा रखे? हाल के कुछ दिनों में रिश्तों को ताख पर रखकर लोगों द्वारा अपनों को मौत के घाट उतारने के कई मामले आए हैं।
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केस एक
प्रेम प्रसंग के चलते गई जगदीश की जान
नौ जुलाई को ढेबरुआ थानाक्षेत्र के सकरौरी गांव निवासी जगदीश साहनी की शादी पहले ही हो चुकी थी। उसके दो बच्चे भी हैं। सूत्रों के मुताबिक जगदीश का कठौतिया गंाव की एक लड़की से प्रेम प्रसंग चल रहा था। जहां वह अपनी प्रेमिका को अपने साथ ले जाने के लिए आया था। मगर वह उसे शादीशुदा बताते हुए उसके साथ जाने से इंकार कर दी। जिसके बाद जगदीश की लाश बंधे पर लटकती मिली। हालांकि आत्महत्या का मामला लोगों के गले से नीचे नही उतर रहा है। मामले की वास्तविकता पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही पता चल पायेगी। आखिर उसकी मौत के पीछे आत्महत्या है या फिर हत्या की साजिश।
केस दो
दहेज की खातिर ले ली थी जान
डुमरियागंज थानाक्षेत्र के महतिनियां बुजुर्ग गंाव निवासी राजाराम ने अपनी सबसे छोटी बेटी सिन्दू की शादी आठ साल पहले भवानीगंज थानाक्षेत्र के बनगंवा गंाव के भुड़कुलडीह गंाव निवासी रामधनी के बेटे हीरालाल के साथ की थी। दो जुलाई की रात को उसके ससुराल वाले साजिश रच उसे मौत के घाट उतारने का प्लान तैयार कर लिया। पति और ससुर ने उसी रात को उसे कमरे में फंदे से लटका उसकी जान ले ली। जिसके बाद पति फरार हो गया। सिन्दू के ससुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
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केस तीन
घरेलू विवाद में युवक ने खाया जहर
आठ जुलाई को त्रिलोकपुर थानाक्षेत्र के जूड़ीकुईयां गंाव निवासी 22 वर्षीय राकेश तिवारी पुत्र विजय राघव तिवारी ने घरेलू विवाद में जहर खा लिया था। जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी। जिसे देख उसके घरवाले उसे इलाज के लिए बेंवा सीएचसी ले जाने लगे थे, मगर रास्ते में उसकी मौत हो गई। मृतक राकेश की दो महीना पहले मई महीने में खन्ता गंाव में शादी भी हुई थी।
केस चार
दहेज के लिए पत्नी की कर दी हत्या
डुमरियागंज नगर पंचायत के लोहिया नगर वार्ड निवासी भगवान दास पुत्र राम नरायण की शादी करीब 10 साल पहले बस्ती जिले के कलवारी थानाक्षेत्र के बेली बजार निवासी रामचंद्र अग्रहरि की बेटी पूनम के साथ हुई थी। नौ जुलाई की रात में भगवान दास ने अपनी पत्नी की दहेज की खातिर इस कदर पिटाई कर दी थी कि उसकी मौत हो गई थी। पूनम के घरवालों का आरोप था कि भगवान रोज-रोज फ्रिज, वाशिंग मशीन आदि घरेलू सामानों की डिमांड कर अक्सर ही शराब पीकर पूनम की बेरहमी से पिटाई करता था।
केस पांच
बच्चा नहीं हुआ तो पत्नी को मार डाला
डुमरियागंज थानाक्षेत्र के पोखराकाजी गांव निवासी राजाराम ने अपने बेटे श्रवण कुमार की शादी बलरामपुर जिले के बभनगांवा गांव निवासी प्रमोद कुमार की बहन सरिता के साथ दस साल पहले की थी। मगर शादी के दस साल बाद भी सरिता को कोई बच्चा पैदा नही हुआ था। जिसको लेकर अक्सर ससुराल पक्ष के लोग उसे प्रताड़ित करते थे। बाद में सरिता अपने मायके चली गई थी। जहां से वह वापस चार साल बाद फिर ससुराल आई थी। आने के ठीक एक साल बाद ससुराल वालों ने सात अगस्त को उसे कमरे में फांसी पर लटका दिया था, और कमरा बंद कर छत पर सोने के लिए चले गये थे। जिसके कुछ देर बाद ही ससुराल वाले उसे अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे। गांव के व्यक्ति ने फोन कर मामले को संदिग्ध बता मायके वालों को बुला लिया था।
केस छह
50 हजार के लिए जला डाला
गोंडा जनपद के नगर कोतवाली के इमामबाड़ा मुहल्ला निवासी रियाज ने अपनी बेटी पारो की शादी दो साल पहले डुमरियागंज थानाक्षेत्र के जबजौआ गांव निवासी दोस्त मोहम्मद के बेटे आस मोहम्मद के साथ धूमधाम से की थी। शादी के बाद आस मोहम्मद मुम्बई में कमाने के लिए चला गया था। पति के ससुराल चले जाने के बाद ससुराल के लोग पारो से मायके से 50 हजार रुपये मांगने की डिमांड कर रहे थे। इस बात को पारो ने फोन पर अपने घर भी बताया था। मगर 14 अगस्त की रात को पारो के सास, ससुर और देवर ने उसे कमरे में बंद कर आग के हवाले कर दिया था।
कोट
किसी के घर के अंदर और मन में चल रही साजिश को कोई भी भांप नहीं सकता है। घटना होने के बाद ही इन कृत्यों का पता चल पाता है। जिसके बाद दोषियों को पकड़ उन्हें सजा दी जाती है। अगर किसी महिला पर अत्याचार हो रहा है, तो वह किसी भी जरिए पुलिस को सूचना दे तो शायद हम उसकी मदद कर सकें। वैसे बदलाव के दौर कम्युनिटी लाइफ खत्म होने से ऐसी घटनायें बढ़ रही हैं। जिसे रोकना सभी का कर्तव्य है।
रामाशीष सिंह यादव, थानाध्यक्ष डुमरियागंज।
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सामुदायिक जीवन खत्म होना वजह
आपराधिक घटना के पीछे अनेक कारण होते हैं। जो परिवार व समाज से जुड़े होते हैं। आज के बदलते परिवेश में घटना को अंजाम देने का सबसे बड़ा कारण सामुदायिक जीवन खत्म होना है। सामाजिक जीवन समाप्त प्राय: होने पर अपनों से डांट या आलोचना को लेकर भय समाप्त होता जा रहा है। पहले जहां समाजिक भय के कारण कोई भी विवाद बढ़ने से पहले ही समाप्त हो जाया करती थी। वहीं अब ऐसा नहीं हो रहा है। कम्युनिटी लाइफ की कमी के कारण आने वाले दिनों में रिश्तों से जुड़े कत्ल की घटनाएं और अधिक बढ़ती दिखेंगी। इसे राकने के लिए समाजवाद को बढ़ावा देना अति आवश्यक है।
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डॉक्टर बृजलता मिश्रा, समाजशास्त्र प्रवक्ता महुआ खुर्द महाविद्यालय।
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