डुमरियागंज। 10 अगस्त 1950 को सिर्फ हिंदू समाज के दलितों को अनुसूचित जाति का आरक्षण देने का अध्यादेश जारी हुआ। इसके बाद बौद्ध धर्म के लोगों को भी अनुसूचित जाति का दर्जा दिया गया। मुसलमान आज तक इस अध्यादेश का विरोध कर रहे हैं। अपने अधिकार और हक के लिए इंसाफ मांग रहे हैं।
ये बातें पीपा के जिलाध्यक्ष जहीर आलम ने वार्ता में कहीं। इस अध्यादेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। अभी कोई फैसला नहीं आया है। केंद्र सरकार ने अप्रैल 2012 में दलित मुस्लिमों को पिछड़े वर्ग में 4.5 फीसदी का आरक्षण देकर ठगने का काम किया। रंगनाथ मिश्र की रिपोर्ट के मुताबिक आरक्षण कम से कम छह और अधिक से अधिक 8.44 प्रतिशत होना चाहिए। मुसलमानों को उनका हक दिलाने के लिए पीस पार्टी 10 अगस्त को देश भर में काला दिवस मनाकर विरोध करेगी। जहीर आलम ने कहा कि जिले कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पर एकत्र होकर अध्यादेश के खिलाफ प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के लिए ज्ञापन डीएम को सौंपेंगे।