सिद्धार्थनगर। जिले में खून की कमी से यदि किसी मरीज की मौत हो तो ब्लड बैंक पर प्रश्नचिन्ह खड़ा होना स्वाभाविक है। जिला अस्पताल का एकमात्र ब्लड बैंक में न तो पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मचारी हैं और न ही टेक्निकल स्टाफ। कर्मचारियाें व डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा ब्लड बैंक इस दशा में कैसे कार्य कर रहा है इसे स्वास्थ्य विभाग बखूबी जानता है। बावजूद इसके कुछ नहीं हो रहा है।
जिला अस्पताल में स्थित एक मात्र ब्लड बैंक पर पूरे जिले के मरीजों को आवश्यकतानुसार खून उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है। परंतु वह खुद ही कर्मचारियाें की कमी से जूझ रहा है। यदि किसी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को रात में खून की आवश्यकता पड़े तो उसे भगवान ही बचा सकते हैं, क्योंकि यहां ब्लड बैंक में रात्रिकालीन सेवा नहीं है। इस ब्लड बैंक से प्रतिदिन मात्र कुल तीन यूनिट रक्त खर्च होता है। जबकि बदले में यहां खून दिया भी जाता है।
इस ब्लड बैंक पर कुल पांच डॉक्टरों के पद सृजित हैं परंतु नियुक्ति एक की भी नहीं है। इस कार्य को डॉ. एससी सिंह जो कि सीनियर पैथालॉजिस्ट हैं अपने कार्य के साथ-साथ संभाल रहे हैं। इसी तरह लैब टेक्निशियन के सृजित पांच पदों के सापेक्ष चार की नियुक्ति ह। स्टॉफ नर्स के पांच पद हैं लेकिन नियुक्ति मात्र एक की है। यही हाल वार्ड ब्वाय कम स्वीपर की है। इनके छह पद हैं लेकिन नियुक्ति मात्र एक की है। ब्लड बैंक में पैथालॉजिस्ट का पद महत्वपूर्ण होता है लेकिन यहां पैथालॉजिस्ट अपने कार्य के साथ ही एक अन्य प्रभार अतिरिक्त लेकर चल रहा है।
इस बाबत सीएमएस डॉ. रामचन्दर का कहना है कि जितनी सुविधाएं शासन से हमें मिल रहीं हैं, उतने में काम चलाया जा रहा है। पत्र लिखे गए हैं परंतु कुछ हो नहीं रहा है ऐसे में हम क्या कर सकते हैं।