इटवा। इटवा तहसील क्षेत्र के लगभग 46 किसानों की जमीन की पैमाइश अधूरी नहर के निर्माण के लिए कराई गई। गांव में 1950 के बाद अब तक चकबंदी नहीं हो सकी, जिसके कारण यहां के किसानों की जमीन अब भी पूर्वजों के नाम दर्ज हैं। इस लिए नहर विभाग से अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा उन्हें नहीं मिल सकता। गांव के किसानों के साथ ही भाजयुमो नेता सौरभ श्रीवास्तव ने इसके लिए मुख्यमंत्री को भी पत्र भेजा है।
तहसील क्षेत्र इटवा के ग्राम सभा महादेव घुरहू के सेमरी लाला में 1950 के बाद अब तक चकबंदी नहीं हुई। यहां 1950 में चकबंदी शुरू हुई तो कार्य में लगाए गए कर्मचारियों ने मनमानी तरीके से चक निकालना शुरू कर दिया, जिससे नाराज गांव के लोगों ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर दी। न्यायालय ने चकबंदी प्रक्रिया पर रोक लगा दी। तबसे लेकर अब तक यहां चकबंदी नहीं हुई और यहां के खेत अब भी लोगों के पूर्वजों के नाम दर्ज हैं। इसी गांव से होकर सरयू नहर निकलती है, जो बलरामपुर सरयू नहर खंड तृतीय के अंतर्गत आती है। चकबंदी न होने से यह नहर इसी गांव के पास आकर रुक गई थी, लेकिन तीन पूर्व यहां नहर खंड के लोगों ने पैमाइश शुरू करा दिया। नहर पैमाइश के बाद गांव के 46 लोगों की जमीन लगभग 46 बीघा नहर परिक्षेत्र में पड़ रही है। नहर विभाग पैमाइश तो करा रहा है, लेकिन उसका कहना है कि वह किसानों की भूमि का मुआवजा नहीं देगा, क्योंकि यहां के किसानों की जमीन उनके नाम पर नहीं है। विभाग के इस आचरण से क्षुब्ध होकर गांव के सतीश चंद्र श्रीवास्तव के नेतृत्व में ज्वाला प्रसाद, भुवनेश्वर प्रसाद, राजेश कुमार सहित अन्य लोगों ने डीएम को पत्र भेजकर बिना चकबंदी कराए नहर विभाग की पैमाइश पर आपत्ति दर्ज कराई है। गांव के लोगों का कहना है कि यहां के लोग खेती से ही अपना गुजर बसर करते हैं। ऐसे में अगर उनकी भूमि बिना मुआवजे के नहर विभाग हथिया लेगा तो उन्हें काफी दिक्कत होगी। भाजयुमो सौरभ श्रीवास्तव ने भी किसानों से जुड़ी इस गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। इस संबंध में सरयू नहर खंड बलरामपुर के अधिशासी अभियंता रामायण प्रसाद का कहना है कि विभाग के निर्देशानुसार जमीन की पैमाइश कराई जा रही है। अभी अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू होने में समय लगेगा।