सिद्धार्थनगर। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की कीमत कैसे चुकानी पड़ती है यह जानना है तो मिलें धीरेंद्र से। 40 वर्षीय धीरेंद्र विकास खंड उसका बाजार के ग्राम पंचायत छितरापार के टोला महदेवा के निवासी हैं। ग्राम पंचायत में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का नतीजा रहा कि उन्हें मुकदमे का सामना करना पड़ा। साथ ही जान से हाथ धोने की धमकी भी मिली। वह न्याय पाने के लिए आज भी भटकने रहे हैं।
महदेवा निवासी धीरेंद्र ने ग्राम पंचायत के स्थानीय नदी घाट नौका संचालन एवं मछली शिकारमाही की नीलामी समेत अन्य मामलों में धोखाधड़ी करते हुए गबन करने का आरोप तत्कालीन प्रधान और उनके पति पर लगाया था। तत्कालीन उप जिलाधिकारी नौगढ़ ने आरोप सही पाया था। प्रशासनिक कार्रवाई होते न देख धीरेंद्र ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर चार जून 2011 को आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई का निर्देश थानाध्यक्ष उसका बाजार को दिया था। पुलिस ने 19 सितंबर 2011 को ग्राम पंचायत छितरापार के पूर्व प्रधान और उनके पति पर मुकदमा पंजीकृत कर जांच शुरू कर दी। इसकी चार्जशीट आज तक न्यायालय में दाखिल नहीं हो सकी है। जांच आज भी जारी है।
पीड़ित धीरेंद्र ने एसपी, डीआईजी बस्ती समेत उच्चाधिकारियों को पत्रक भेजकर जान माल की सुरक्षा की मांग की है। इस संबंध में थानाध्यक्ष उसका बाजार कैलाशनाथ यादव का कहना है कि मामले की जानकारी कर अग्रिम कार्रवाई करेंगे। इस संबंध में प्रभारी एसपी/अपर पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार वर्मा का कहना है कि इस मामले की जानकारी कर पीड़ित को हर हाल में न्याय दिलाया जाएगा।