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बच्चे के व्यवहार में दिखे बदलाव तो रहें सचेत

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सिद्धार्थनगर। बच्चे के व्यवहार में एकाएक बदलाव दिखे तो अब अभिभावक सचेत हो जाएं। कहीं आप का बच्चा ब्लू व्हेल गेम के चंगुल में तो नहीं फंसने लगा है। बच्चे का एकाकीपन व मानसिक रूप से परेशानी भी ब्लू ह्वेल खेल में फंसने का संकेत हो सकता है। इससे बचाव का एकमात्र उपाय है किशोर उम्र के छात्रों संग मित्रवत व्यवहार करना। शनिवार को चाइल्ड लाइन की टीम ने शोहरतगढ़ के मुड़िला खुर्द स्थित छत्रपति शिवाजी स्मारक जीजीबाई इंटर कॉलेज में कार्यक्रम कर लोगों को जागरूक किया। छात्रों को ब्लू व्हेल गेम के दुष्परिणामों की जानकारी दी।
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केंद्र समन्वयक सुनील उपाध्याय ने कहा कि ब्लू व्हेल गेम का आविष्कार रूस की एक छात्रा ने किया था। 50 दिनों तक चलने वाले इस गेम में रोजाना एक टास्क दिया जाता है। जो अव्यवहारिक होता है। अंतिम चरण में गेम खेलने वाले को आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया जाता है। जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले इस खेल से लोग दूरी बनाए रखें तभी भलाई है। इस दौरान प्रधानाचार्य रामचंद्र चौबे, रामलोचन, मधुर श्याम, दयाराम विद्यार्थी, जनार्दन त्रिपाठी, सरिता, कलाकांत उपाध्याय, गणेश पांडेय, ओमप्रकाश यादव आदि मौजूद रहे।

बच्चों को सिर्फ स्मार्ट फोन के भरोसे न छोड़ें अभिभावक
सिद्धार्थनगर। ब्लू व्हेल गेम से बढ़ते खतरे ने अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है। बच्चों की जिद पर उन्हें स्मार्ट फोन थमाने वाले अभिभावकों में बेचैनी साफ दिख रही है। बच्चों का एकाकीपन व मानसिक रूप से परेशानी बच्चों को इसे गेम की ओर धकेल रही है। रोमांचक गेम में प्रतिभाग करने की इच्छा भी इस ओर जाने के लिए प्रेरित करती है। ऐसे में कोई रोक-टोक न होने से बच्चे चपेट में आ जाते हैं। एक प्राइवेट कंपनी में अधिकारी पद पर कार्यरत भीमापार निवासी विश्वजीत झा ने कहा कि ब्लू व्हेल गेम के जाल में किशोर उम्र के छात्र फंस रहे हैं। इस उम्र के छात्रों को अभिभावकों के साथ की जरूरत होती है, लेकिन एकाकी जीवन में रोमांचक खेल की तलाश में ब्लू व्हेल से जुड़ रहे हैं। इस खतरनाक खेल पर रोक लगाने के लिए शिक्षक, अभिभावक के साथ समाज के लोगों को आगे आना पड़ेगा। जगदीशपुर निवासी सतीश सिंह कहते हैं कि किशोर उम्र के छात्रों को कंप्यूटर व स्मार्ट फोन देने से पहले देखें कि उसकी आवश्यकता है या नहीं। किशोर के प्रतिदिन के व्यवहार पर भी नजर रखने की जरूरत है। प्रधानाचार्य सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल थरौली कामाख्या सिंह ने कहा कि ब्लू व्हेल गेम को लेकर स्कूल प्रशासन सतर्क है। छात्रों की काउंसिलिंग कराई जा रही है। प्रत्येक छात्रों के व्यवहार पर नजर रखने के लिए शिक्षकों को निर्देशित किया गया है। बालरोग चिकित्सक डॉ. संजय चौधरी कहते हैं कि किशोर उम्र के लोगों को पारिवारिक संरक्षण प्राप्त होना चाहिए। बच्चों के संग अभिभावकों का मित्रवत व्यवहार होना चाहिए। स्कूलों में कुछ अंतराल पर मानसिक विकास कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए। इसमें मनोवैज्ञानिकों की विशेषज्ञ के रूप में बुलाए तो छात्रों का सर्वांगीण विकास होगा।
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पुलिस ने जारी किया अलर्ट
सिद्धार्थनगर। डीजीपी सुलखान सिंह ने ब्लू व्हेल गेम से संबंधित दिशा निर्देश जारी किया। कहा कि गेम के जाल के दुष्परिणाम बताया जाए। गैर सरकारी संगठनों से सहयोग लिया जा सकता है। जन जागरूकता के लिए सोशल मीडिया पर भी प्रचार-प्रसार किया जाए। स्कूल, कालेजों में शिक्षक, अभिभावकों संग पुलिस विचार विमर्श करेगी। परामर्श में बच्चों के बदलते व्यवहार को देखने की नसीहत दी जाएगी। सुरक्षात्मक पहलू भी बताया जाएगा। छात्रों संग गोष्ठी भी आयोजित किया जाएगा। छात्रों को बताया जाएगा कि जीवन अमूल्य है, इसका गलत उपयोग नहीं किया जाए। इस संबंध में सीओ सदर डीके सिंह ने कहा कि ब्लू व्हेल गेम के संबंध में दिए गए दिशा निर्देशों का पालन किया जाएगा। विद्यालयों में जन जागरूकता गोष्ठी आयोजित की जाएगी। बच्चों को बताया जाएगा कि जीवन अनमोल है, इसकी हिफाजत करे।
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