महोत्सव की पांचवीं रात काव्य के नाम रही, राहुल को लगी ठंड तो मोदी ने कहा, आधार से रजाई तेरी लिंक नहीं है... को भी मिली खूब सराहना
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अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। महोत्सव की पांचवीं रात काव्य के नाम रही। हास्य रचनाआें पर लोगोें ने खूब ठहाके लगाए। व्यंग्य को भी सराहा गया। शृंगार, वात्सल्य और प्रेम को भी खूब पसंद किया। ओज और सामाजिक कटाक्ष की बात आई तो लोग जोशीले हो उठे। इस जोश में तालियों गड़गड़ाहट देखते ही बन रही थी। देर रात चले इस आयोजन में लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। बस यही लग रहा था वक्त यूं ही थम और मस्ती चलती रहे।
रविवार रात कवि सम्मेलन एवं मुशायरे की शुरूआत लखनऊ की कवयित्री कविता तिवारी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद बारी आई हास्य की। कवि अनिल बौझड़ ने तू आपन करो ईद, हम आपन करीं होली, न तू हमसे बोलो, न हम तुंहसे बोलीं... सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी। गीतकार शैलेंद्र मधुर ने अपनी मधुर आवाज में आप हमको जनाब कहते हैं, अपनी आंखों का ख्वाब कहते हैं... सुनाकर लोगों को भाव-विभोर कर दिया। अपने काया के चलते जब हास्य के कवि शंभू शिखर माइक संभालने पहुंचे तो बरबस ही लोग ठहाके लगाने लगे। राहुल को लगी ठंड तो मोदी ने कहा, आधार से रजाई तेरी लिंक नहीं है...।
शंकर कैमूरी ने अपनी जोशीली आवाज में देश प्रेम की कविताएं सुनाकर लोगों को राष्ट्र प्रेम की भावना से ओतप्रोत कर दिया। नैनीताल की युवा कवयित्री गौरी मिश्रा के मंच पर आते ही युवा दर्शकों का उत्साह दोगुना हो गया। गुलाबी नोट से ज्यादा गुलाबी गाल कर दूंगी... गीत भरपूर तालियों बजाकर लोगों उनका उत्साह बढ़ाया। ओज की कवि डॉ. कविता तिवारी ने अपनी रचनाओं के तेवर से माहौल को जोशीला बना दिया और कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। अगर माटी के पुतले देह में ईमान जिंदा है, शहीदों की बदौलत मेरा हिंदुस्तान जिंदा है...। सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। इस कविता के पंडाल भारत माता की जय के नारे सुनाई देने लगे।
अनिल चौबे ने अपनी चुटीली रचनाओं, शायरा शबीना अदीब ने गजलों और गीतों से महफिल लूट ली। लोगों की फरमाइश पर उन्होंने -तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत, नई-नई है... पर लोगों की खूब वाहवाही मिली। वीर रस के जोशीले कवि विनीत चौहान ने पड़ोसी देश पर अपने तीखे शब्द बाण फेंक कर माहौल में राष्ट्रप्रेम की भावना पैदा कर दी। आतंकी कैसे घुस आए, लाहौरी दरबारों से, लगता है कुछ चूक हुई है घर के पहरेदारों से...। जैसी रचानाएं सुनाकर सर्दी में गर्मी लाने का काम किया। मशहूर शायर मंजर भोपाली ने अपने खूबसूरत तरन्नुम में गजलें और गीत पेश कर मुशायरे को एक नई ऊंचाई दी। लोगों की फरमाइश पर प्यार के कटोरे में गंगा का पानी, तुम भी पियो, हम भी पीएं बड़ी मेहरबानी...। सुनाकर गंगा-जमुनी तहजीब का पैगाम दिया। देर रात तक चले महोत्सव में संचालक गजेंद्र सोलंकी तथा अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि हरिनारायण हरीश की दमदार प्रस्तुतियों से लोग विविध रसों की काव्यधारा में गोते लगाते रहे। कार्यक्रम में सांसद जगदंबिका पाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष स्नेहलता पाल, विधायक सदर श्यामधनी राही, इटवा विधायक डाँ. सतीश द्विवेदी सहित, एसपी डॉ. धर्मवीर सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सौम्या पांडेय, एएसपी मुन्ना लाल, उपजिलाधिकारी सदर उमेश चन्द्र निगम, प्रभारी जिला सूचना अधिकारी आशुतोष पांडेय आदि मौजूद रहे।