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खोजकर मारे जाएंगे जेई संवाहक सुअर

Mon, 28 May 2018 11:29 PM IST
siddharthnagar
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सिद्धार्थनगर। जेई-एईएस से बचाव को लेकर पशु पालन विभाग सुअरों को खोज कर उनके रक्त की जांच कराएगा। जांच में जेई संवाहक की पुष्टि होने के बाद ऐसे सुअरों को दवा देकर मारा जाएगा। इसके पीछे सरकार की मंशा है कि जिले में बरसात से पहले इंसेफेलाइटिस पर काबू पाया जा सके।

पूर्वांचल के लिए अभिशाप बन चुके इंसेफेलाइटिस की चपेट में आकर हर साल कई मासूम जान गंवाते है। जबकि कुछ मानसिक रूप से बीमार और कई दिव्यांग हो जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि बीमारी की मुख्य वजह सुअर हैं। इन्हीं के माध्यम से इंसेफेलाइटिस बीमारी तेजी से फैलाती है। लिहाजा शासन ने पशु पालन विभाग को निर्देश देकर बाड़े में पलने व घूमने वालों सुअरों के रक्त के नमूने एकत्र करके जांच कराने का निर्देश दिया है। शासन से आए निर्देश के बाद विभागीय जिम्मेदार जांच में जुट गए हैं। सभी अस्पतालों के पशु चिकित्साधिकारियों को जांच करने के लिए निर्देश दिया गया है। रिपोर्ट में जो भी सुअर बीमारी से संक्रमित मिलेगा उसे इंजेक्शन देकर मार दिया जाएगा।

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200 से अधिक गांव हैं इंसेफेलाइटिस प्रभावित
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें जो जिले में दो से अधिक गांव जेई-एईएस बीमारी से प्रभावित है। चिह्नित गांवों में विशेष ध्यान देने का निर्देश भी दिया गया है। इन गांवों में लोटन ब्लॉक के कौलपुर, तुलसीपुर, मल्लाहडीह, भरता सहिला, टिकरिया, नादेपार, जोगिया आदि गांव शामिल है।

जिले में 10 हजार से अधिक सुअर
पशु पालन विभाग के आकड़ों पर गौर करें तो जिले के 14 ब्लॉकों में लगभग 10 हजार से अधिक सुअर हैं। यह सरकारी आंकड़े हैं। इसके अलावा कई ऐसे गांव भी है, जहां पर सुअर बड़े स्तर पर पाले जाते है।
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मथुरा जाता है रक्त का नमूना
विभाग के अनुसार सुअर से लिए जाने वाले ब्लड सेंपल को जांच के लिए मथुरा भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद संक्रमित सुअर को मार दिया जाता है। पिछले साल जोगिया क्षेत्र के एक गांव में एक सूअर संक्रमित मिला था, जिसको सूई देकर मार दिया गया था।
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सूअरों की जांच हर माह की जाती है। ब्लॉकवार जांच के निर्देश दिए गए हैं। हर माह पांच सुअर का ब्लड सैंपल के जांच के लिए मथुरा भेजा जाता है। जिस भी सूअर में इंसेफेलाटिस के संवाहक मिले उसे इंजेक्शन के माध्यम से मार दिया जाएगा।
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- डॉ. फणीश सिंह, सीवीओ, सिद्धार्थनगर

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