डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर)। शिया मुसलमानों के तीसरे इमाम हजरत इमाम हुसैन के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम की यौम-ए- शहादत पर शुक्रवार को हल्लौर कस्बे में अकीदतमंदों ने अलम व ताबूत का जुलूस निकाला। जुलूस पूरे कस्बे में भ्रमण करते हुए कर्बला पर पहुंचा। इसके पूर्व गुरुवार की रात गांव में कई जगहों पर ताजिया रखकर अकीदतमंदों ने रतजगा कर नौहा मातम किया। हल्लौर कस्बे में शुक्रवार को शाम तौकीर हसन मरहूम के घर पर मजलिस व मर्सिया आयोजित की गई। मर्सियाख्वानी डॉ. खुर्शीद अहमद व उनके हमनवां ने की।
मजलिस को खिताब करते हुए जाकिरे अहिलेबैत जमाल हैदर ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन के चचेरे भाई हजरत मुस्लिम को कूफियों ने अपने यहां मेहमान बुलाया और बेदर्दी से उन्हें शहीद कर दिया था। उनकी याद में शिया मुसलमान हर साल बकरीद के एक दिन पहले उनकी शहादत को याद कर नौहा मातम कर उन्हें खिराजे अकीदत पेश करते हैं। हजरत मुस्लिम के शहादत की दास्तां सुनकर मजलिस में मौजूद अकीदतमंदों की आंखों से आंसू बहने लगे। मजलिस के बाद अकीदतमंदों ने अलम व ताबूत का जुलूस निकाला, जो जनाबे सकीना के रौजे से होता हुआ इमामबाड़ा हुसैनिया बाबुल, इमामबाड़े कला और दरगाह हजरत अब्बास, जन्नतुलबकी होते हुए नौहा मातम के बीच कर्बला पर पहुंचा। गुरुवार की रात रखे गए ताजियों को बड़े एहतराम के साथ सुपुर्द- ए-खाक कर दिया गया। कर्बला में हजरत मुस्लिम से मंसूफ हैदर हल्लौरी, सज्जाद, डॉ. कायनात, खुर्शीद, शकील, हानी, फैजी आदि ने दर्द भरे नौहे पढ़े, इस पर अकीदतमंदों ने सीनाजनी किया।
इस दौरान अजीम हैदर, पप्पू अंकल, काजिम मेंहदी, असकरी शमीम रिजवी, मोहम्मद इमरान, इमरान हैदर अमन, आदिल, औन, शकील हैदर, अफरोज, हुसैन कदर, साहिल, माल बाबू, ततहीर, जामिन, हैदर, मंटू, महमूद रजा, वजीर हैदर, जानशीन अहमद आदि मौजूद रहे।