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दौलत ही नहीं, एचआईवी भी ला रहे परदेसी

Fri, 30 Nov 2018 10:47 PM IST
siddharthnagar/ संतोष श्रीवास्तव
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HIV
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सिद्धार्थनगर। जिले से रोजगार के लिए बाहर जाने वाले लोग आर्थिक संपन्नता के साथ ही एचआईवी भी अपने साथ ला रहे हैं। प्रतिवर्ष ऐसे लोगों की संख्या में औसतन पांच सौ बढ़ रही है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में स्थापित एआरटी सेंटर में पंजीकृत आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2018 में अक्तूबर जिले में एचआईवी पीड़ितों की संख्या 3703 है। इनमें अधिकांश पुरुष बाहर रोजगार करने वाले हैं। ये लोग जानकारी के अभाव में पत्नी और बच्चों को भी संक्रमित कर दे रहे हैं।
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आज विश्व एड्स दिवस है। इस अवसर पर लोगों एचआईवी से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। जागरूकता के ये कार्यक्रम वर्ष भर सतत चलते रहते हैं। बावजूद इसके एचआईवी पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है। काउंसलिंग के दौरान यह बात सामने आई है कि मुंबई या दूसरे बड़े शहरों से जिले में एचआईवी संक्रमित होकर आने वाले लोग जानकारी के अभाव में अपनी पत्नी को भी इससे संक्रमित कर रहे हैं। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक रोजी-रोटी के लिए जनपद की 28 लाख की आबादी में 2 लाख 97 हजार लोग महानगरों में रहते हैं। इसमें से अधिकांश मुंबई में रोजगार करते हैं।

छह स्वास्थ्य केंद्रों पर जांच की सुविधा
एचआईवी पर नियंत्रण के उद्देश्य से जिला चिकित्सालय के अलावा जनपद के छह स्वास्थ्य केंद्रों पर आईसीटीसी (इंट्रीग्रेटेड काउंसलिंग टेस्टिंग सेंटर) पर जांच, काउंसलिंग की सुविधा प्रदान की गई है।
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वर्षवार एचआईवी पीड़ितों की संख्या
वर्ष    पुरुष   महिला   बच्चे           कुल
2013  553 522 109               1184
2014 756 766 148               1670
2015 1016 1054 215            2285
2016 1232 1260 251            2743
2017 1385 1415 308            3108
2018 1669 1685 349           3703

मुंबई से संक्रमित होकर आ रहे लोग
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डाँ. रोचस्मति पांडेय कहती हैं कि जिला चिकित्सालय में काउंसलिंग के दौरान इलाज के लिए आ रहे मरीजों में अधिकांश के मुंबई से बीमार होकर आने की बात सामने आई हैं। स्वयं के साथ ही ये लोग पत्नी को भी संक्रमित कर रहे हैं। महिला के संक्रमित होने से पैदा होने वाले बच्चे भी एचआईवी से ग्रसित हो रहे हैं।

एचआईवी से लोग संक्रमित न हों, इसके लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस दिशा में समाज के अहम वर्गों को भी इस दिशा में आगे आने की आवश्यकता है। जिला अस्पताल के एआरटी सेंटर समेत स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित आईसीटीसी में आने वाले मरीजों की काउंसलिंग करते हुए जागरूक करने के साथ ही उपचार निशुल्क किया जाता है।
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-डॉ. आरके मिश्र, मुख्य चिकित्साधिकारी
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