सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में छात्रों को छात्रावास सुविधा नहीं मुहैय्या हो सकी। तीसरा सत्र शुरू हो गया लेकिन छात्र-छात्राएं ग्रामीण क्षेत्रों में किराए पर कमरा लेकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर है। हास्टल न होने से छात्राओं को सर्वाधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यूनिवर्सिटी में नेपाल व पड़ोसी जिलों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं नियमित शिक्षा प्राप्त कर रहे है।
सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी में शिक्षण कार्य का तीसरा सत्र प्रारंभ हो गया है। तीन सत्र से केवल वाणिज्य संकाय में ही नियमित कक्षाएं संचालित हो रही है। बीकाम में तीन सत्र से शिक्षण प्राप्त कर रहे छात्रों के सामने आवासीय सुविधा की बड़ी परेशानी है। हास्टल न होने से सैकड़ों छात्र-छात्राएं किराये पर कमरा लेकर पढ़ाई कर रहे है। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूनिवर्सिटी का लोकार्पण 15 अक्टूबर 2016 को किया था। उसी समय सीएम ने घोषणा की थी कि यूनिवर्सिटी में आवासीय सुविधा देने के लिए छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। लेकिन तीन सत्र बीतने के बाद भी हास्टल नहीं बन सका। इस संबंध में महाराजगंज निवासी बीकॉम द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत छात्रा एकता सिंह कहती है कि एक सत्र की पढ़ाई किराए पर कमरा लेकर किया। लगता है कि इस सत्र में भी हास्टल नहीं मिल सकेगा। किराए पर कमरा लेने से समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सूपा बाजार निवासी बीका द्वितीय वर्ष के छात्र महेंद्र प्रताप चौधरी कहते हैं कि किराए पर कमरा लिया है। गांव में कमरा होने के कारण बिजली व भोजन की समस्या सामने आ रही है। इससे पढ़ाई बाधित हो रही है। महाराजगंज निवासी बीकॉम प्रथम वर्ष के छात्र अंबरीश कुमार पांडेय कहते हैं कि यूनिवर्सिटी पहुंचने के लिए कोई साधन नहीं है। पड़ोस के गांव में किराए पर कमरा बड़ी मुश्किल से मिला। कैंपस में हास्टल की सुविधा मिल जाती तो पढ़ाई और भी आसान हो जाती। इटवा तहसील निवासी शफीकुर्रहमान बीकाम प्रथम वर्ष में पढ़ाई कर रहे है, कहते है कि किराए पर कमरा लेने के बाद सुरक्षा की बड़ी समस्या आ रही है। कमरे में ताला लगाने के बाद हमेशा भय बना रहता है कि सामान सुरक्षित है कि नहीं। परिसर में छात्रावास होना आवश्यक है। इस संबंध में कुलसचिव बीएन सिंह ने कहा कि हास्टल निमार्णाधीन है। कार्यदाई संस्था ने अभी हॉस्टल को हैंडओवर नहीे किया है। निर्माण पूर्ण होने पर छात्रों को छात्रावास में आवासीय सुविधा दी जाएगी।