बढ़नी/परसा (सिद्धार्थनगर)। बाढ़ पीड़ितों का दर्द जानने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सैलाब के आगे बेबस लोगों की हालत से पूरी तरह व्यथित नजर आए। जनता का दर्द उनके चेहरे पर भी झलक रहा था। पीड़ितों के नजदीक जाकर उनसे मिलने, हाल जानने से सीएम खुद को रोक न सके। मोटरबोट पर बैठकर मैरुंड गांवों की ओर रवाना हो गए। उफनाई बूढ़ी राप्ती में मोटरबोट पर करीब एक घंटे तक मुख्यमंत्री सवार रहे। खैरी शीतल प्रसाद के खैरी टोले में पहुंचकर सीएम ने पीड़ितों से मुलाकात की। उनसे प्रशासन से मिल रही सुविधाओं के बारे में पूछा।
डीएम कुणाल सिल्कू को निर्देश दिया कि इन गांवों में पर्याप्त राहत सामग्री पहुंचाई जाए। मैरुंड गांवों में प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। ग्रामीणों ने हर साल बाढ़ से तबाही की पीड़ा जाहिर की। इससे निजात के लिए नदी के पास ठोकर बनवाने की मांग की। सीएम ने सांसद जगदंबिका पाल व विधायक अमर सिंह चौधरी को निर्देश दिया कि प्रस्ताव तैयार कर भेजवाए, स्वीकृति प्रदान की जाएगी। उन्होंने विधायक से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी करने व मदद पहुंचाने को कहा। उन्होंने कहा कि राहत कार्यों की मॉनिटरिंग मैं स्वयं करुंगा। कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इससे पहले सिसवा उर्फ शिवभारी में नजरगढ़वा, खैरी, शीतल प्रसाद, अकरहरा, रामनगर, रेकहट गांव के 10 बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री वितरित की। इस मौके पर सांसद व विधायक के अलावा डॉ.रुद्रप्रताप शाह, डॉ. राकेश प्रताप शाह, राजू शाही, राजकुमार अग्रहरि, हियुवा के देवीपाटन मंडल प्रभारी सुभाष गुप्ता, जिला महामंत्री अजय सिंह आदि मौजूद रहे।
बाढ़ से पीड़ित गर्भवती महिला को पहुंचाया अस्पताल
परसा। बढ़नी के तालकुंडा के तमकुहवा की रहने वाली प्रसव पीड़िता चिनकी पत्नी विजय की तबीयत खराब होने की खबर मुख्यमंत्री के आगमन की तैयारी में लगे एसडीएम शोहरतगढ़ एसपी सिंह को शुक्रवार सुबह मिली। तुरंत एसडीएम ने मोटरबोट भेजकर पीड़िता को पीएचसी बढ़नी सुरक्षित पहुचाया।
आनन-फानन में खुला बाढ़ राहत कैंप
परसा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के मद्देनजर आनन-फानन में तहसील प्रशासन ने ढेबरुआ स्थित स्वतंत्रता सेनानी उदयराज शुक्ल बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बाढ़ राहत कैंप को स्थापित किया। यहां हजारों की संख्या में करौता, टीकर, चिरहगना, पन्नापुर, गोनहा, तमकुहवा, भुतहवा, मटियार, झुंगहवा, मोहनकोली, कौववा, झुंगहवां, तिरछहवा आदि गांवों से पीड़ित नावों से आकर दोपहर तक केवल पंजीकरण करवाने के लिए परेशान रहे।
अरसे बाद बाढ़ क्षेत्र में पहुंचा कोई मुख्यमंत्री
बढ़नी। तराई क्षेत्र में बाढ़ कोई नई बात नहीं है। अमूमन हर साल यह क्षेत्र बाढ़ की विभीषिका झेलता है। तबाह होता है फिर आबाद होता है। मगर अरसे बाद यह पहला मौका है, जब कोई मुख्यमंत्री खुद बाढ़ग्रस्त इलाके में पीड़ितों का हाल जानने पहुंचा है। मोटरबोट पर बैठकर मैरुंड गांवों तक पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह साबित किया कि महंत और सांसद रहते हुए इस क्षेत्र से उनका जितना लगाव था, सीएम बनने के बाद उसमें जरा भी कमी नहीं आई है। वह हर घड़ी में लोगों के साथ हैं। बता दें कि इससे पहले गत वर्ष भी यह क्षेत्र बाढ़ झेल चुका है। तब तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव जिले में आए थे। हवाई सर्वे के बाद पुलिस लाइन में समीक्षा कर वहीं से लौट गए थे।