सिद्धार्थनगर। लोकसभा चुनाव में सबसे पहले प्रत्याशियों की घोषणा करने वाली कांग्रेस पार्टी अब तक प्रत्याशी घोषित नहीं कर सकी है। जबकि चुनावी मैदान में भाजपा और गठबंधन के सूरमा मैदान का खाक छान रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ता अब भी असमंजस की स्थिति में है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि आखिर वह किस प्रत्याशी के लिए मैदान में जाए। जबकि 16 अप्रैल से नामांकन का दौर भी शुरू हो जाएगा।
सत्ता से दूर जा चुकी कांग्रेस डुुमरियागंज लोकसभा सीट से जिताऊ प्रत्याशी की तलाश मेैं। कांग्रेस की शरण में जाने के लिए जिले के कई दिग्गज दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की दौड़ लगा चुके है। इसमें पूर्व सांसद सहित भाजपा के दो नेता शामिल है। साथ ही एक दिग्गज कांग्रेसी भी इस दौड़ में शामिल है। लेकिन अब तक कांग्रेस प्रत्याशी का चयन नहीं कर सकी है। इस बीच सोशल मीडिया पर भाजपा का प्रचार प्रसार कर रहे एक नेता का नाम भी प्रत्याशी के तौर पर उभरा। लेकिन वह नाम सोशल मीडिया से आगे बढ़ नहीं सका। इस बीच अब केवल दो नामों की चर्चा ने कांग्रेस प्रत्याशियों में थोड़ी तेजी लाई है। इनमें एक पूर्व विधायक जो की कुर्मी बिरादरी से आते हैं। दूसरा नाम एक ब्राह्माण का हैं, जो दिल्ली से लेकर लखनऊ तक दौड़ लगा रहे हैं। और उनके समर्थक चुनावी मैदान में उन्हें मजबूत करने का काम कर रहे हैं। ऐसे में अब देखना यह होगा कि कांग्रेेस किसका हाथ मजबूत करती है।
सियासी गणित देखकर दिया जाएगा टिकट
कांग्रेस पार्टी के एक वरिष्ठ नेता की माने तो डुमरियागंज की सियासी गणित देखकर इस बार टिकट का बंटवारा किया जाएगा। क्योंकि अब तक भाजपा को छोड़कर किसी दल ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं। भाजपा ने सांसद जगदंबिका पाल पर फिर से भरोसा जताया है। जबकि गठबंधन से बसपा लोकसभा प्रभारी आफताब आलम पूरे-जोर शोर से मैदान में हैं, लेकिन अब तक बसपा ने भी उन्हें प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। वही पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मो. आयूब भी प्रचार-प्रचार में जुट गए हैं। ऐसे में कांग्रेस इस ताक में है कि कौन पार्टी किसे चुनाव मैदान में उतराती है। उसी गणित के अनुसार जातीय समीकरण के आधार पर प्रत्याशी का चयन किया जाएगा।