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‘पं. दीन दयाल चाहते थे हर व्यक्ति को मिले सुविधा’

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केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। पंडित दीन दयाल उपाध्याय चाहते थे कि समाज के हर व्यक्ति को हर सुविधा मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसे पूरा करने के लिए कदम दर कदम उठा रही है। ऐसे समाज के निर्माण के दिशा में काम हो रहा है, जिसमें न तो कोई छोटा और न तो कोई बड़ा। ये बातें केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ल ने रविवार को सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय का अर्थ चिंतन’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में कहीं। मंत्री ने कहा कि पंडित जी अर्थशास्त्री नहीं थी, लेकिन उनकी पुस्तकों में अर्थशास्त्र है। उनका नारा था कि कमाने वाला खिलाएगा, लेकिन कमाने वाला ही खा रहा है।
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शुक्ल ने कहा कि पंडित जी समाज को जोड़ने की बात कहते थे। सरकार उसी दिशा में काम कर रही है। मुद्रा योजना उसी की देन है। केंद्र सरकार ने अब तक 13 करोड़ लोगों को रोजगार देने का काम किया है। 2015 में यूएन ने सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात कही। पंडित जी ने इसे काफी पहले कहा था। वह अंधाधुंध विकास के पक्षधर नहीं थे। वह सही थे। इसका उदाहरण कानपुर है। वह कभी मैनचेस्टर कहा जाता था, लेकिन आज विकास की रफ्तार थम गई है। केदारनाथ धाम की तबाही भी अंधाधुंध विकास की देन है।पंडित जी जैविक खेती की बात करते थे, आज लोग उसी राह पर चल रहे हैं। वह चाहते थे कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुविधा पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर घर को बिजली, गैस कनेक्शन, आवास, शौचालय देकर उसे पूरा कर रहे हैं। शुक्ल ने कहा कि ट्रिपल तलाक किसी समस्या का समाधान नहीं।

विशिष्ट अतिथि सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि पं. दीन दयाल बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। इटवा विधायक डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि पंडित जी गरीबों के हिमायती थे। सदर विधायक श्यामधनी राही ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। अध्यक्षता कुलपति प्रो सुरेंद्र दूबे ने की। उन्होंने कहा कि पं. दीन दयाल के आदर्शों पर चलकर ही देश का विकास संभव है। कार्यक्रम का संचालन डीएन पांडेय ने किया। इस मौके पर काशी विवि के दीन दयाल उपाध्याय शोध पीठ के अध्यक्ष प्रो. एसके मिश्र, कुलसचिव उदय प्रताप सिंह, डॉ. दिग्विजय नाथ पांडेय, वाणिज्य विभाग के एचओडी डॉ. दीपक मिश्र, परीक्षा नियंत्रक व्यास नारायण सिंह आदि मौजूद रहे। दूसरे सत्र की अध्यक्षता सामाजिक चिंतक महेंद्र कुमार, प्रो. अनिल दत्त मिश्रा, झांसी विवि के प्रो देंवेंद्र कुमार भट्ट, केएन मिश्रा, कार्यक्रम के संयोजक डॉ डीएन पांडेय, डॉ प्रत्युष दूबे आदि मौजूद रहे।
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