बांसी (सिद्धार्थनगर)। अल्लाह के प्रति समर्पण व त्याग का पर्व ईद-उल-अजहा बकरीद शनिवार को मनाया जाएगा। आज से चौदह सौ साल पहले हजरत इब्राहिम ने अपने चहेते पुत्र हजरत इस्माइल को अल्लाह की रजा के लिए कुर्बान करने का प्रयास किया था। तभी से इस्लाम धर्म के अनुयायी इस पर्व को हजरत इब्राहिम की सुन्नत के रूप में मनाते हैं। त्योहार को लेकर कस्बे में जहां खरीदारी जोरों पर रही, वहीं मस्जिदों-ईदगाहों की साफ-सफाई की गई।
अकबर नगर मोहल्ला में स्थित मदरसा अनवारुल वलुम के सदर मोदर्रिस मौलाना कारी सैयद अब्दुल ताहिर ने बताया कि चौदह सौ साल पूर्व सऊदी अरब में हजरत इब्राहिम ने रात में सपना देखा कि वह अपने चहेते पुत्र हजरत इस्माइल को अल्लाह की राह में कुर्बान कर रहे हैं। सुबह जब वह सो कर उठे तो काफी परेशान थे। उनका यह हाल देख हजरत इस्माइल ने परेशानी का सबब पूछा, तब पिता हजरत इब्राहिम ने रात में देखे गए सपने के बारे में बताया। इसे सुन हजरत इस्माइल ने पिता का सपना पूरा करने के लिए कुर्बानी को तैयार हो गए। हजरत इब्राहिम अपने पुत्र इस्माइल को लेकर मीना की पहाड़ी पर पहुंचे और आंख पर पट्टी बांधकर बेटे को लेटाकर उसके गले पर छुरी चला दी। अल्लाह को उनकी कुर्बानी पसंद आई और हजरत इस्माइल को हटाकर उनके स्थान पर दुंबा जानवर को लिटा दिया। बकरीद पर्व इस्लाम धर्म को मानने वाले इस सुन्नत को अदा कर मनाते हैं।
बांसी में नमाज का वक्त
ईद-उल-अजहा पर सभी ईदगाहों में विशेष नमाज होगी। नगर के पटेल नगर मोहल्ले में स्थित ईदगाह में सात व साढ़े सात बजे और नरकटहा की दो ईदगाहों में 6.45 व 7 बजे नमाज अदा होगी। यह जानकारी दोनों ईदगाह के नाजिम दिलशाद मेकरानी, सैयद इम्तियाज अली मीर व अब्दुल मोहिद खान ने दी है।