सुअर के पांच नमूनों में इंसेफेलाइटिस वायरस की पुष्टि
सिद्धार्थनगर।
जिले में इंसेफेलाइटिस के वायरस ने दस्तक दे दी है। जोगिया स्थित एक सुअर बाड़े से लिए गए पांच सेंपल में इंसेफेलाइटिस के वायरस मिले हैं। प्रयोगशाला भेजे गए सेंपल की इस रिपोर्ट ने खलबली मचा दी है। पशु पालन विभाग भी इसे मान रहा है, लेकिन फौरी सतकर्ता बरतने की बजाए अभी अधिकृत पत्र आने के इंतजार में है। अफसरों की दलील है कि जब तक पत्र नहीं आता, वह कुछ नहीं कर सकेंगे।
नेपाल सीमा पर स्थित जिले में इंसेफेलाइटिस महामारी का रूप ले चुकी है। हर साल दर्जनों लोग इंसेफेलाइटिस की चपेट में आकर जान गंवा रहे हैं। 155 गांव डेंजर जोन में चिह्नित हैं। शासन-प्रशासन भी इंसेफेलाइटिस की रोकथाम को लेकर गंभीर है। लाख सतर्कता के बावजूद इसका असर कम होने का नाम नहीं ले रहा। बारिश के साथ ही इंसेफेलाइटिस का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए ही एक माह पहले जिले के विभिन्न क्षेत्रों से इंसेफेलाइटिस वायरस के वाहक सुअर का सेंपल लेकर जांच को प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच के दौरान जोगिया स्थित सुअरबाड़े से लिए गए पांच सेंपल में इंसेफेलाइटिस की पुष्टि हुई है। फोन पर मिली इस सूचना ने जिले के सरकारी महकमे में खलबली मचा दी है। पशु पालन विभाग भी अलर्ट हो गया है। हालांकि विभाग की कोशिशें अभी यहीं तक सीमित है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ.फणीश सिंह का कहना है कि मौखिक रूप से पांच सेंपल में इंसेफेलाइटिस वायरस होने की पुष्टि मिली है, लेकिन अभी अधिकृत पत्र का इंतजार किया जा रहा है। जब तक पत्र नहीं आता, कुछ कहा नहीं जा सकता। हो सकता है कि किसी ने शरारत के मकसद से झूठी सूचना दे दी हो। वैसे पशुपालन विभाग अपने स्तर पर अलर्ट है।
---
बचाव के लिए मारने होंगे सभी सुअर
इंसेफेलाइटिस के वायरस किसी को शिकार न बना सकें, इसके लिए इसके वाहक को खत्म होगा। विभागीय अफसरों की मानें तो जिस सुअर के ब्लड सेंपल में वायरस की पुष्टि हुई है, उसे खत्म करना होगा। साथ ही उन्हें जमीन में काफी नीचे दफनाया जाएगा, जिससे दोबारा किसी अन्य में संक्रमण का अंदेशा न रहे। इसके लिए पुलिस फोर्स व मजिस्ट्रेट की जरूरत होगी। पीड़ित सुअर के संपर्क में रहने वाले अन्य सुअरों में भी वायरस की खोजबीन की जाएगी।
---
आबादी के बीच चल रहे सौ से अधिक सुअर बाड़ा
इंसेफेलाइटिस के वायरस सुअर के शरीर में परजीवी के तौर में बढ़ते हैं। उनके शरीर से भोजन प्राप्त कर अपना विकास करते हैं। यही कारण है कि सुअरबाड़ों को आबादी से दूर स्थापित करने का निर्देश दिया गया है। बावजूद जिले में सौ से अधिक सुअर बाड़े अभी भी आबादी के बीच ही चल रहे हैं। इनमें पलने वाले सुअरों की संख्या पौने दो सौ से अधिक है। जिस सुअर बाड़े में वायरस की आशंका जताई जा रही है, वहां कई अन्य सुअर भी पल रहे हैं। ऐसे में खतरे की आशंका प्रबल है।
---
इंसेफेलाइटिस से ऐसे बचें::
घर के आस-पास साफ-सफाई रखें।
टायर, पुराने घड़े व पानी जमा होने वाले पात्र न रहने दें।
मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
गहरी बोरिंग वाले स्वच्छ पानी का सेवन करें।
बुखार होने पर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।