सिद्धार्थनगर। जेलों में आए दिन हो रही हिंसक झड़प व कैदियों के भागने की घटनाओं के बाद भी जेल प्रशासन सतर्क नहीं हैं। संवेदनशील जेल होने के बाद भी यहां की सुरक्षा व्यवस्था होमगार्ड जवानों के हाथों में है। बंदी रक्षकों के 100 पदों के सापेक्ष महज 40 की ही तैनाती है। शेष की पूर्ति होमगार्ड कर रहे हैं। कई स्थानों पर बंदियों की भी मदद ली जा रही है। यह हाल तब है, जब जिला जेल में नेपाल की खुली सीमा से महज 20 किमी दूर है और इसमें कई शातिर अपराधी बंद है। वर्ष 2009-10 में यहां से तीन कैदी भी भाग चुके हैं। बावजूद होमगार्ड जवानों के हाथों में सुरक्षा व्यवस्था की कमान सौंपी गई है।
जिला जेल की क्षमता 500 बंदियों व कैदियों की है। इनकी सुरक्षा के लिए 100 बंदी रक्षकों का पद सृजित है। इसके सापेक्ष मौजूदा समय में जेल में करीब 600 बंदी हैं, जबकि सुरक्षा कर्मियों की संख्या महज 40 है। इनकी पूर्ति 60 होमगार्ड जवानों से हो रही है। जिला कारागार में जरूरत अनुरूप बंदी रक्षकों की संख्या नहीं है।
ऐसे स्थिति में जेल में आए दिन हो रही हिंसक झड़पों पर कैसे रोक लगाया जा सकता है, आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं। यहां सुरक्षा की जिम्मेदारी उन कंधों पर डाल दी गई है, जो खुद असुरक्षित हैं। जिनको कभी कभार जंग लगी हथियार तो मुहैया कर दी जाती है, मगर इसके लिए कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
जेलों में लगातार हो रही घटनाओं के बाद भी जेल प्रशासन सतर्क नहीं दिख रहा है। पहले देवरिया जिला कारागार में बंदियों के दो गुटों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें सुरक्षाकर्मी सहित कई लोग जख्मी हुए। इसके बाद हाल ही में मंडलीय कारागार गोरखपुर में कैदियों ने बंदी रक्षकों पर हमला कर दिया था।
दो दिन पहले दीपावली की रात सिमी के आठ आतंकी बंदी रक्षक की हत्या कर फरार हो गए। आए दिन हो रहे वारदात के बाद भी जेल प्रशासन सुरक्षा को लेकर सतर्क नहीं हैं। इस संबंध में जेलर बीके गौतम का कहना था कि जेल में पर्याप्त सुरक्षा का इंतजाम हैं। बंदी रक्षकों की संख्या कम है, मगर उनके स्थानों पर होमगार्ड जवानों को लगाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कमी नहीं है।