सिद्धार्थनगर। परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होना जरूरी है। लेकिन विभाग के पास निर्धारित संख्या में शिक्षकों की कमी है। लिहाजा इसमें सुधार एक बड़ा सवाल है। पूरे जिले में 490 स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक ही शिक्षक हैं। पांच स्कूल सिर्फ शिक्षामित्र के भरोसे ही संचालित हैं। आरटीई के मानकों के तहत प्रत्येक 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए, जिले में यह अनुपात 37 बच्चों पर एक शिक्षक का है। अंग्रेजी माध्यम की व्यवस्था लागू होने के बाद यह अनुपात और भी गड़बड़ा गया है।
जिले में 1924 प्राथमिक व 740 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में कुल 2.74 लाख बच्चे नामांकित हैं। इन्हें बेहतर शिक्षा के लिए 10310 शिक्षकों के पद सृजित हैं। इनके सापेक्ष 7489 शिक्षक-शिक्षामित्रों की ही तैनाती है। जरूरत से कम शिक्षक होने के चलते तमाम स्कूलों में सिर्फ एक-एक शिक्षक ही नियुक्त हैं। शिक्षकों का यह संकट सबसे ज्यादा उन ब्लॉकों में है, जो मुख्यालय के करीब है। हार्ड व साफ्ट ब्लॉक के कारण दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती है। जबकि साफ्ट क्षेत्र में तय मानक के अनुरूप भी शिक्षक नहीं है। इसका सीधा असर बच्चों के पठन-पाठन पर पड़ रहा है। पांच-पांच कक्षाओं को शिक्षक अकेले पढ़ा रहे हैं। मिड-डे-मील और कार्यालयीय जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर है। विशेष परिस्थितियों में वह स्कूल छोड़कर बीआरसी या किसी बैठक में शामिल होने आए तो उस दिन बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे ही रहती है।
इस संबंध में बीएसए मनीराम सिंह का कहना है कि जिले में शिक्षकों की कमी होने से कई स्कूल गत वर्ष बंद थे। आसपास के स्कूलों के शिक्षकों को संबद्ध कर सभी स्कूलों को संचालित करा दिया गया है। अन्य शिक्षकों को तैनात कर गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन का खाका खींचा जा रहा है।