सिद्धार्थनगर। नेपाल के कई जिलों में महामारी बनकर कहर ढा रहे लंपी वायरस से 48 हजार पशुओं की मौत हो चुकी है। बड़ी संख्या में पशुओं के संक्रमित होने और मौत के बाद नेपाल सरकार पशु पालकों को राहत देने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास बलुवटार में कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री डॉ. बेदुराम भुसल की उपस्थिति में एक बैठक की।
महामारी से प्रभावित किसानों को राहत देने और उनके लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। वहीं, सीमा पर फैली महामारी से जिले में पशु चिकित्सा विभाग अभी तक लंपी वायरस से बचाव का टीका लगाने के लिए तिथि तय करने में जुटी है। गलाघोंटू टीकाकरण चल रहा है। 10 अगस्त से तक उसके समाप्त होने के बाद लंपी वायरस से बचाव के लिए टीका लगाएंगे।
सीमा से सटे नेपाल में लंपी वायरस की चपेट में 12 जनपद में अबतक 11 लाख पशुओं के आने की अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 48 हजार पशु बीमारी से ग्रसित होकर दम तोड़ चुकेे हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने मंगलवार को आपात बैठक बुलाई। बैठक में प्रधानमंत्री प्रचंड ने कहा कि सरकार हाल ही में जानवरों में देखी गई लंपी स्किन डिजीज को नियंत्रित करने को लेकर गंभीर है।
कृषि एवं पशुधन विकास मंत्री डॉ. भुसल ने बताया कि वैक्सीन के उपयोग के लिए आवश्यक अनुमति भी दी जाने वाली है। मंत्रालय के मुताबिक देशभर में कुल मिलाकर 11 लाख से अधिक पशु इस रोग से प्रभावित हुए हैं। इनमें से 86000 जानवर ठीक हो चुके हैं। वर्तमान में 1.81 लाख पशु पूर्ण रूप से संक्रमित हैं। मवेशियों की मौत से सीधे तौर पर 30 अरब रुपये का नुकसान हुआ है। कृषि एवं पशुधन विकास मंत्रालय के सचिव डॉ. गोविंदा प्रसाद शर्मा का कहना है कि चूंकि किसान सीधे प्रभावित हैं। राष्ट्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. मीन बहादुर श्रेष्ठ ने कहा कि चूंकि किसान सीधे प्रभावित हुए हैं, इसलिए उचित राहत देने पर तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए।
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10 अगस्त के बाद लगाएंगे लंपी से बचाव का टीका
सिद्धार्थनगर। भारत-नेपाल की सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। दोनों देशों के बीच पशुओं का आना-जाना रहता है। चरने के लिए पशु दूर तक चले जाते हैं। ऐसे में वहां से इस पार संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है। लेकिन अभी तक जिले का पशु चिकित्सा विभाग बीमारी को गंभीर नहीं मान रहा है। पूरे जनपद में टीकाकरण न कर सकें। तो सीमावर्ती क्षेत्र के सीमा से सटे 68 किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले गांवों के पशुओं को लंपी वायरस से बचाव का टीका अबतक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर देना चाहिए था। इसके साथ ही किसानों को जागरूक करना चाहिए था। लेकिन अभी तक पशु चिकित्सक की ओर से बीमारी के से बचाव के संबंध में कोई जागरुकता कार्यक्रम भी शुरू नहीं किया गया है।
इस संबंध में पशु चिकित्साधिकारी जीवन लाल ने बताया कि अभी पशुओं के खुर पका, मुंहपका से बचाव के लिए टीकाकरण चल रहा है। डेढ़ लाख से अधिक पशुओं को टीका लग चुका है। यह अभियान पूरा हो जाने के बाद 10 अगस्त से लंपी वायरस से बचाव के लिए टीकाकरण किया जाएगा। लंपी वायरस से बचाव के लिए 20 हजार डोज टीका है। जिसे पशुओं को लगाया जाएगा।