शोहरतगढ़ (सिद्धार्थनगर)। विकास खंड के ग्राम पंचायत गड़ाकुल में ब्रिटिश काल में बना पूर्व माध्यमिक विद्यालय का एक कमरा शुक्रवार को बारिश में ढह गया। गनीमत रहा कि घटना स्कूल खुलने से पहले हुई, नहीं तो बढ़ा हादसा हो जाता। भवन को कंडम घोषित कर दिया गया था, बावजूद जिम्मेदार इसी परिसर में कक्षाएं संचालित कर रहे हैं।
अंग्रेजी हुकुमत में बने भवन में संचालित हो रहे पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भवन विभागीय अधिकारियों व प्रधानाध्यापक की लापरवाही के कारण जर्जर हो गया। बारिश के दौरान शुक्रवार को विद्यालय खुलने से 15 मिनट पहले ही एक कमरा ढह गया। विद्यालय में अगर पठन-पाठन के दौरान यह घटना घटित हुई होती बड़ा हादसा हो सकता था। विद्यालय भवन की स्थिति को देखकर यह स्पष्ट हो रहा है कि जिम्मेदारों की लापरवाही व विभाग से मिले धन का दुरुपयोग होने के कारण स्कूल का भवन जर्जर होता चला गया। स्कूल का कमरा गिरने के बाद भी प्रधानाध्यापक गायत्री देवी जर्जर भवन में ही शिक्षण कार्य को संचालित करा रही थी। सूचना पर बीईओ विजय गुप्ता ने मौके पर आकर स्थिति का जायजा लिया और प्रधानाध्यापक को सामने बने जूनियर विद्यालय में पठन-पाठन संचालित करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद भी जर्जर भवन में ही शिक्षण कार्य संचालित हो रहा था। इससे स्पष्ट होता है कि विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों को बच्चों के जानमाल की सुरक्षा का परवाह नहीं है। बता दें कि कुछ दिन पूर्व तत्कालीन बीएसए अरविंद पाठक ने परिषदीय विद्यालय के प्रधानाध्यापकों को जर्जर भवन व बाउंड्रीवाल का ध्वस्तीकरण कर ईंट व अन्य सामानों को व्यवस्थित करने का निर्देश दिया था। इस पर आज तक कोई अमल नहीं हुआ।
कई बार विभाग से की गई मरम्मत की मांग
जर्जर भवन में पठन-पाठन कर रहे छात्र शिवकुमार, आकाश, बरकत अली, अंकित प्रजापति, उमा, सुष्मिता अंकिता और सुमित्रा ने बताया कि जर्जर छत के नीचे पढ़ाई के दौरान भय बना रहता है। शिक्षक इसी में हम लोगों को पढ़ाते है। इस हादसे के बाद बच्चों में भय बना हुआ है। इसके बाद भी शिक्षक बेपरवाह होकर जर्जर भवन में ही बच्चों को पढ़ा रहे है। प्रधानाध्यापक गायत्री देवी ने बताया कि स्कूल का एक कमरा गिरने के बाद बच्चों की छुट्टी कर दी गई। कुछ छात्र को एक कमरे में बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। पूरा विद्यालय जर्जर हो चुका है। मरम्मत कार्य के लिए विभाग से कई बार धन की मांग की गई। इस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।