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36 घंटे बाद भी छाया है सन्नाटा, नहीं जले कई घरों के चूल्हे

Fri, 27 Oct 2017 10:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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चिल्हिया क्षेत्र के लखनपारा गांव में मायूस मृतक के घरवाले। - फोटो : अमर उजाला
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चिल्हिया। शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के लखनपारा गांव में आग की भेंट चढ़े मां और तीन बच्चों के शवों का गुरुवार की रात अंतिम संस्कार कर दिया गया। गांव के ही कब्रिस्तान में चारों के शव सुपुर्दे खाक किए गए। जिला अस्पताल में भर्ती कलाम अपनी पत्नी व बच्चों के शव की अंतिम झलक भी नहीं देख सका। घटना के 36 घंटे बाद भी पूरे गांव में मातम छाया हुआ है। शुक्रवार को भी कई घरों में चूल्हे नहीं जले। 
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लखनपारा गांव में बुधवार रात छप्पर के मकान में आग लगने से अंदर सो रही कलाम की पत्नी जैनबनिशा, बेटी रुखसार, पुत्र कलीम व वसीम की झुलसने से मौत हो गई थी। वहीं, कलाम भी गंभीर रूप से झुलस गया था। घटना के बाद से ही वह जिला अस्पताल में भर्ती है। सिर्फ चुनिंदा लोगों को ही उसके पास जाने दिया जा रहा है। इस वीभत्स घटना से हर कोई मर्माहत है। उन तीन मासूम बच्चों की मौत लोगों को अधिक साल रही है, जिन्होंने अभी तक ठीक से दुनिया भी नहीं देखा था। उनके हंसते-खिलखिलाते चेहरे हर जानने वालों की आंखों के सामने घूम रहा है। घटना को 36 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, मगर अभी भी चारों तरफ मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।
स्तब्ध लोग कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है। मां व बच्चों की मौत से मर्माहत लोगों को खाना-पानी भी नहीं सूझ रहा है। पड़ोसी समन, तरन्नुम, सैयदा, बुजरुक, गयासुद्दीन आदि के घरों में शुक्रवार की दोपहर तक चूल्हे ठंडे पड़े थे। इनका कहना था कि बच्चों की मौत नहीं भूल रही। यकीं नहीं हो रहा है कि सामने ही खेलने-कूदने वाले मासूम बच्चों को कभी नहीं देख सकेंगे। उधर, गुरुवार की देर शाम पोस्टमार्टम के बाद सभी शवों को घर लाया गया है। यहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार गांव के बाहर कब्रिस्तान में ले जाकर मां व तीनों बच्चों के शव दफन कर दिए गए। 
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