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शरीयत में फेरबदल की कोशिश न करे सरकार

Sun, 04 Feb 2018 11:01 PM IST
siddharthnagar
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बेलसड़ ईदगाह के समीप रविवार को शरीयत बचाओ कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर।नगर के बेलसड़ ईदगाह के समीप रविवार को हुए शरीयत बचाओ कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि सरकार इस्लामी कानून में कोई भी फेरबदल की कोशिश न करे। हिंदुस्तान के मुसलमान इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे।
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कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए मौलाना व उलेमा ने कहा कि भारतीय संविधान का हम सम्मान करते हैं। संविधान के तहत हमें यह आजादी मिली है कि हम धर्म और धार्मिक नियमों के अनुसार अपना गुजारा कर सकें। हर मुसलमान इसी के तहत जीवन जी रहा है, मगर सरकार शरीयत में फेरबदल कर हमारे धार्मिक अधिकारों के हनन पर आमादा है। वक्ताओं ने कहा कि मुसलमान सभी धर्मों का सम्मान करता है और अन्य धर्म के लोगों से यह अपेक्षा भी करता है कि उनके धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप न किया जाए।

वर्षों से शरीयत के अनुसार जीवन-यापन कर रहे हैं, अब इसे बदलने की कोशिश सफल नहीं होने दी जाएगी। तीन तलाक की पूरी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि मुस्लिम समाज में स्त्री-पुरुष का विवाह विच्छेद का प्रतिशत 0.5 फीसदी है, जबकि अन्य आबादी में यह 5 प्रतिशत है। सरकार पहले इनके बारे में विचार करे, फिर कोई कानून लाए। अध्यक्षता मौलाना हफीजुल्लाह व संचालन अब्दुल्लाह आरिफ ने की। कांफ्रेंस में जिला पंचायत सदस्य मो.उमर, मौलाना अहमद अली, मौलाना बरकत अली, मौलाना अब्दुल हक, मौलाना अली अहमद बिस्मिल अजीजी, मौलाना इद्रीश बस्तवी, मौलाना साध्वअली, मौलाना मुफ्ती अब्दुल हकीम नूरी, मौलाना अरबाब फारुकी आदि ने विचार रखे।
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