सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में 300 बेड अस्पताल का संचालन फर्नीचर न आने से शुरू नहीं हो पा रहा है। योजना के अनुसार कार्य में देर होने के कारण संयुक्त जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज के रूप में आकार नहीं ले पा रहा है। इस कारण गंभीर मरीजों को रेफर करने की नौबत आ रही है। गंभीर मरीजों को गोरखपुर ले जाने में बीच रास्ते उनकी मौत तक हो जा रही है।
मेडिकल कॉलेज में 300 बेड का अस्पताल, ट्रामा सेंटर, सीसीयू और ब्लड कंपोंनेंट यूनिट का अधर में लटका है। यही वजह है कि डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को दूसरे जिलों में भेजा जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 1200 मरीज पहुंच रहे हैं, जबकि इमरजेंसी सहित अन्य भर्ती मरीजों की संख्या 50 से 80 तक होती है। ऐसी स्थिति में ये सुविधाएं शुरू हो जाएं तो मरीजों को बहुत राहत मिलेगी।
ऐसी है स्थिति
300 बेड का अस्पताल: मेडिकल कॉलेज के जिला अस्पताल परिसर में 300 बेड का अस्पताल बनकर तैयार है। इसमें ओटी, वार्ड सहित अन्य सुविधाएं भी हैं। बेड व फर्नीचर की आपूर्ति में देर होने के कारण अस्पताल का संचालन नहीं हो पा रहा है।
ट्रामा सेंटर: मेडिकल कॉलेज परिसर में करीब चार करोड़ रुपये से बनाए जा रहे ट्रामा सेंटर का काम जून तक पूरा हो जाना चाहिए, लेकिन इसमें तीन माह और देर होने की आशंका है। ट्रामा सेंटर में गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए आईसीयू की भी सुविधा होगा, जबकि इसी परिसर सीसीयू भी बनाई जा रही है।
ब्लड कंपोंनेंट यूनिट : मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट यूनिट बनाने का काम छह माह से अटका हुआ है। इसमें तीन मशीनों की आपूर्ति नहीं हो पाई है, जबकि इस यूनिट को शुरू होने के बाद खून के तत्वों को अलग अलग करके एक ही यूनिट खून से तीन मरीजों की जान बचाई जा सकती है।
मेडिकल कॉलेज में 300 बेड के अस्पताल को शुरू करने में फर्नीचर का इंतजार है, इसके लिए प्रमुख सचिव को पत्र भेजा गया है। ट्रामा सेंटर के कार्य में देर हो गई है, जबकि ब्लड कंपोंनेंट यूनिट को जल्द शुरू करने के लिए पत्राचार किया जा रहा है।
- डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य