2004 में शुरू की गई स्वजल धारा योजना के जरिये देउरवा, धरनिहवा और नेतवर में नहीं पहुंचा शुद्ध पेयजल1
लोटन। पीने का साफ पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2004 में शुरू की गई स्वजल धारा योजना अंजाम तक नहीं पहुंच पाई है। करोड़ों रुपये की लागत से बनी ओवरहेड पानी की टंकी दो दशक बीतने के बाद भी लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही है। देउरवा, धरनिहवा और नेतवर में टंकी बनकर तैयार है। बिजली कनेक्शन भी है। पाइपलाइन भी कई जगह बिछाई जा चुकी है और सार्वजनिक स्थानों पर टोंटियां भी लगाई जा चुकीं हैं लेकिन ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय लापरवाही के कारण करोड़ों रुपये की योजना हाथी का दांत साबित हो रही है। निर्माण कार्य वर्ष 2004 में शुरू हुआ था। 2006 तक घर-घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन समय सीमा बीतने के करीब 20 वर्ष बाद भी योजना पूरी नहीं हो सकी है। कई स्थानों पर पाइपलाइन का काम पूरा नहीं हुआ जबकि सार्वजनिक स्थानों पर लगी टोटियां भी अब गायब हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय-समय पर मरम्मत के नाम पर कागजों में धन खर्च होने की चर्चा होती रही लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ओवरहेड टैंक लावारिस हालत में खड़ा है। अधूरे कार्य के कारण इसे ग्राम पंचायत को भी हैंडओवर नहीं किया जा सका है।
तेज प्रताप सिंह, प्रेमचंद मोदनवाल, अरबाज चौधरी, जितेंद्र बहादुर सिंह, वजीर हसन, त्रयंबक सिंह, अनवर, दिलीप सिंह, संतोष सिंह, अजय चौहान और राम बहादुर यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से योजना की निष्पक्ष जांच कराकर इसे संचालित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार का उद्देश्य हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना था लेकिन वर्षों बाद भी लोग इस सुविधा से वंचित हैं।
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क्या बोले जिम्मेदार
जल निगम के अधिशासी अभियंता संजय कुमार जायसवाल ने बताया कि बजट की कमी के कारण कार्य रुका हुआ है। बजट उपलब्ध होते ही शेष निर्माण कार्य शुरू कर योजना को पूरा कराया जाएगा।