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सवा करोड़ रुपये से बनेगा पांच अंत्येष्ठी स्थल

Tue, 22 Jan 2019 10:46 PM IST
brijesh kumar ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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मीडिया से मुखातिब होते एसपी। - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। स्वच्छ और साफ जगहों पर दाह संस्कार हो, इसके लिए सरकार स्थाई अंत्येष्टि स्थल के विस्तार पर जोर दे रही है। जिले के कपिलवस्तु, बांसी, इटवा व डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र मेें कुल पांच अंत्येष्टि स्थल बनाए जाएंगे। स्थल तक पहुंचने के लिए इंटरलॉकिंग सड़क और बैठने की उचित व्यवस्था और बाउंड्री बनाने की भी योजना है। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी इस बार ग्राम प्रधानों की होगी। अंत्येष्टि स्थल के निर्माण कार्य के लिए लगभग सवा करोड़ रुपये पंचायती राज विभाग की ओर से संबंधित गांव के प्रधानों के खाते में भेजा जा चुका है।
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सूबे की योगी सरकार धार्मिक स्थल के संरक्षण और उसके विस्तार पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इसी क्रम में सरकार ने अंत्येष्टि स्थल बनाए जाने की कवायद शुरू की है। इस वर्ष सरकार ने जिले में पांच नए अंत्येष्टि बनाए जाने की स्वीकृति दी है। इसके लिए शासन स्तर से धनराशि भी अवमुक्त कर दी गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही निर्माण भी शुरू हो जाएगा। इससे पूर्व जिले में 33 अंत्येष्टि स्थल का निर्माण हो चुका है। जिसमें भाजपा सरकार ने पिछले साल तीन अंत्येष्टि स्थल बनवाए हैं। डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि पांच अंत्येष्टि स्थल जिले में बनाए जाएंगे। इसके लिए बजट की भी स्वीकृत हो चुका है। एक अंत्येष्टि स्थल के निर्माण में 24 लाख रुपये खर्च होंगे। निर्माण की जिम्मेदारी इस बार ग्रामप्रधानों की होगी।

अब 24 लाख रुपये हुई राशि
विभाग की माने तो योगी सरकार के बनाने के बाद अंत्येष्टि स्थल के निर्माण की लागत में दोगुना बढ़ोतरी की गई है। पूर्ववर्ती सरकारों में जहां 13 लाख रुपये अंत्येष्टि स्थल के निर्माण की राशि थी। वही, अब यह राशि 24 लाख कर दी गई है। लागत बढ़ने के साथ-साथ सुविधाएं भी बढ़ाने के निर्देश सरकार ने दिए हैं।
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इस प्रकार बनेगा अंत्येष्टि स्थल
विभाग की माने तो जो अंत्येष्टि स्थल अब बनेंगे, वहां स्थल तक जाने के लिए मार्ग की व्यवस्था होगी। इसके अलावा अंतिम संस्कार में शामिल होने वालों के लिए बैठने की उचित व्यस्था की जाएगी। पर्यावरण संरक्षण के दृष्टि पर भी ध्यान दिया जाएगा। निर्माण ऐसे स्थान पर होगा कि जहां से आबादी दूर हो और लाश जलाने के बाद वातावरण प्रदूषित न होने पाए।
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