सिद्धार्थनगर। जिले में जैसे-जैसे फर्जी शिक्षकों की जांच का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वैसे-वैसे फर्जीवाड़ा गैंग जिले से भागने की फिराक में है। एक लिपिक पल-पल जांच की सूचना फर्जीवाड़े गैंग को दे रहा हैं। यही कारण है कि नोटिस के बाद भी अब तक विभाग उन नौ शिक्षकों तक नहीं पहुंच पाया, जिनकी डिग्री को विभाग ने फर्जी पाया है। उन पर अपनी रहमोकरम विभाग बरसाए हुए है। जबकि मामला शासन स्तर तक पहुंच गया है। वीडियो कांफ्रेसिंग में प्रमुख सचिव ने जांच के निर्देश भी दिए है।
जिले में फर्जी शिक्षक का मामला हमेशा से ही विवादों में रहा है। जांच में दो दर्जन से अधिक फर्जी शिक्षक पिछले चार से पांच सालों के बीच में मिल भी चुके हैं। इसी साल डुमरियागंज में नौ ऐसे शिक्षक मिले, जिनकी डिग्री फर्जी पाई गई। उन्हें विभाग ने नोटिस भी दिया। लेकिन अब तक उनका अता-पता नहीं है। जबकि विभागीय सूत्रों की माने तो इन फर्जी शिक्षकों के सत्यापन में खेल खेला गया। यही वजह है कि वेतन के रूप में ये लाखों रुपये ले चुके हैं। इसकी जानकारी विभाग को भी उस समय थी, लेकिन विभाग मामले में चुप्पी साधे रहा। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि इस काम में बिना बड़े अधिकारियों की सेटिंग से यह संभव नहीं है। बीएसए राम सिंह ने बताया कि जितनी सूची अब तक मिली है। उस हिसाब से शिक्षकों की जांच कराई जा रही है। राजस्थान से लेकर दिल्ली तक स्पेशल मैसेंजर से डिग्री जांच के लिए भेजा गया है। इसके अलावा इलाहाबाद भी कुछ सूची भेजी गई है।
वीडियो कांफ्रेसिंग में गूंजा मामला
फर्जी शिक्षक का मामला शासन स्तर पहुंच गया है। यही वजह है कि पिछले दिनों प्रमुख सचिव ने डीएम को कमेटी बनाकर जांच का आदेश दिया है। साथ ही वीडियो कांफ्रेसिंग में भी मामला गूंजा है। अमर उजाला की खबर को संज्ञान में लेते हुए जांच के आदेश भी दिए गए है। मामले में पूरी निगाह भी रखी जा रही है। सूत्र बताते हैं कि जिले में करीब 600 से अधिक शिक्षक संदिग्ध है।
अब तक एक लिपिक बनता रहा विशेष वाहक
अब तक जितने भी शिक्षक भर्ती के मामले आते रहे हैं। उसमें एक हमेशा से ही विशेष वाहक बनने का काम करता रहा है। सूत्रों की माने तो हर मामले में विभाग उसे ही विशेष वाहक की जिम्मेदारी सौंपता रहा है। जबकि मौजूदा समय में उस लिपिक का स्थानांतरण भी हो गया है। इसके बाद भी वह इस बीच आए दिन बीएसए कार्यालय में देखा जा रहा है।