सिद्धार्थनगर। प्रभारी मंत्री चेतन चौहान ने बुधवार को अंबेडकर सभागार में जिले की विकास योजनाओं के प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान विद्युत व्यवस्था को लेकर वह खिन्न दिखे। निर्धारित शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति न मिलने पर विभागीय अफसरों से जवाब मांगा। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर नाराज मंत्री ने कार्यप्रणाली में सुधार की हिदायत दी।
करीब चार घंटे तक चली समीक्षा बैठक में मंत्री का पिछली बैठक में दी गई हिदायतों के अनुपालन पर विशेष जोर रहा। विद्युत विभाग के सिद्धार्थनगर व डुमरियागंज खंड के एक्सईएन से उपलब्ध कराई जा रही बिजली के बारे में जानकारी ली। दोनों अधिकारी समुचित उत्तर नहीं दे सके। भारत सरकार की ओर से सभी मजरों, गांवों को ऊर्जीकृत किए जाने के लिए प्राप्त धनराशि से दिसंबर 2018 तक सभी गांवों-मजरों में कार्य पूरा करने की हिदायत दी। एक्सईएन घनश्याम मिश्र ने बताया कि 3181 मजरों में खंभे लगा दिए गए हैं और 2234 मजरों में बिजली पहुंच गई है, जहां बल्ब जल रहे हैं। अवशेष मजरों में नवंबर माह के अंत तक विद्युतीकरण करा दिया जाएगा। प्रभारी मंत्री ने पीडब्लूडी, ग्रामीण अभियंत्रण, मंडी समिति, गन्ना विकास व अन्य एजेंसियों से जनपद की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की कार्रवाई की प्रगति पर असंतोष जताया। निर्देश दिया कि कार्य में प्रगति लाकर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने की कार्रवाई पूरी करें। अफसरों को निर्देश दिया कि जो अधिकारी समीक्षा बैठकों में लगातार तीन बार अनुपस्थित रहे, उसे चिह्नित कर सूचना शासन को प्रेषित की जाए, जिससे उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। बैठक में सांसद जगदंबिका पाल, विधायक श्यामधनी राही, डॉ.सतीश द्विवेदी, अमर सिंह चौधरी, जिलाधिकारी कुणाल सिल्कू, एसपी सत्येंद्र कुमार, सीडीओ अनिल कुमार मिश्र, एडीएम बाबूराम, सीएमओ डॉ.राजेंद्र कपूर, एसडीएम नौगढ़ डॉ.महेंद्र कुमार, पीडी डीपी सिंह, एक्सईएन पीडब्लूडी सीपी गुप्ता, भूपेश मणि त्रिपाठी, डीडी कृषि डॉ.राजीव कुमार, डीडीओ सुदामा प्रसाद, डीआईओएस सोमारू प्रधान, बीएसए अरविंद कुमार पाठक, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुुतोष पांडेय आदि मौजूद रहे।
...फिर भी घंटों गुल रही नगर की बत्ती
प्रभारी मंत्री चेतन चौहान ने समीक्षा बैठक बिजली व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई, बावजूद जिले की बिजली व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिखा। प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में भी दोपहर में 4 घंटे तक नगरीय क्षेत्र की बिजली व्यवस्था ठप रही। यह हाल मुख्यालय फीडर का था। रेलवे क्रॉसिंग के दूसरे हिस्से को बिजली देने वाले टाउन फीडर-टू की हालत और भी खराब थी। बारिश के बाद धूप से उमस के बीच लोग गर्मी से छटपटाते रहे।