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पुरानी पेंशन बहाली के लिए भरी हुंकार

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बीएसए कार्यालय के प्रांगण में धरना देने के बाद पुरानी पेंशन बहाली मंच के कर्मचारी, शिक्षक व अधिकारी पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे । - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। कर्मचारी, शिक्षक व अधिकारी पुरानी पेंशन बहाली मंच की द्वारा बीएसए कार्यालय प्रांगण में आयोजित एक दिवसीय धरने में केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। मांग किया कि सरकार जल्द से जल्द पुरानी पेंशन योजना को बहाल करें। डीएम कार्यालय तक पैदल मार्च कर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र जिलाधिकारी को सौंपा। कर्मचारियों के धरने के कारण स्कूलों व कार्यालयों में काम बाधित रहा।
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मंच के जिलाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने कहा कि पुरानी पेंशन की लड़ाई का शंखनाद गत वर्ष ही हो चुका है, सरकार के अड़ियल रवैये से हम सभी को दूसरे चरण का धरना प्रदर्शन को बाध्य होना पड़ा। पेंशन भीख नहीं है, यह कर्मियों का अधिकार है। हमारे चुकाए गए टैक्स से जनप्रतिनिधियों को आजीवन पेंशन मिलती है। इसलिए अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त कर्मियों को भी मिलनी चाहिए। देश में अब दोहरी नीति नही चलेगी, सरकार चेत जाए नही तो उन्हें आगामी चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। संयोजक अनिल सिंह ने कहा कि समस्त कर्मचारी अब पेंशन पाने के लिए आर पार की लड़ाई का मन बना चुका है। मंच के मंत्री योगेंद्र प्रसाद पांडेय सभी किसी झांसे में नही आने वाले अब पुरानी पेंशन बहाली तक यह आंदोलन चलता रहेगा। संचालन सुजीत जायसवाल ने किया। चंद्रभूषण पांडेय, भूपेश शुक्ला, उदयभान मिश्रा, लालजी यादव, प्रभाकर शुक्ला, सुनील त्रिपाठी, ओंकार नाथ, लालजी गौतम ने भी संबोधित किया। रूपेश सिंह, अभय श्रीवास्तव, हरिशंकर सिंह, उदयभान मिश्रा, शैलेंद्र मिश्रा, चंद्रमणि, अरुण सिंह, सुधाकर मिश्रा, इंद्रसेन सिंह, अश्विनी त्रिपाठी, पूर्णिमा, आशुतोष उपाध्याय, नीतू त्रिपाठी, दिव्यांशु सिंह, रामशंकर पांडेय, द्विजेन्द्र पांडेय, नसीम अहमद, रामप्रकाश मिश्रा, मुस्तन शेरुल्लाह, वेद यादव, ऋषि द्विवेदी, शिवाकांत, प्रमोद, अनिल, अबू बक्र, अनीता, शिव कुमार शुक्ला, मंजूर इलाही आदि मौजूद रहे।

बाधित हुई पढ़ाई, जरूरतमंद लौटे बैरंग
पुरानी पेंशन बहाली को लेकर आयोजित धरने में दो हजार की संख्या में जुटे कर्मचारी, शिक्षक व अधिकारियों की सक्रियता देखी गई। इसके चलते प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई बाधित रही। सरकारी कार्यालयों में भी कामकाज ठप रहा। लिहाजा आने वाले जरूरतमंदों को बैरंग लौटना पड़ा। प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना भी प्रभावित हुई। प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई की कमान शिक्षा मित्रों और जूनियर में अनुदेशकों ने संभाली।
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