200 पोषण वाटिकाएं ‘कुपोषण’ की शिकार
विभागीय सुस्ती से बच्चों को कुुपोषण से बचाने का सपना चकनाचूर
चिह्नित 200 में 79 का ले-आउट और 41 में सिर्फ मिट्टी कार्य पूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए जिले के 200 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका स्थापित होनी थी। छह माह बाद भी 79 का ले-आउट तैयार हो सका है। जबकि 41 में सिर्फ मिट्टी का कार्य पूर्ण हो पाया है। पौधरोपण कार्य एक भी वाटिका में नहीं हो सका है। लिहाजा पोषण वाटिका अभी भी ‘कुपोषित’ पड़ी है।
जनपद में 200 आंगनबाड़ी केंद्रों को मॉडल के रूप में बनाने के साथ ही उसके परिसर में पोषण वाटिका की स्थापना की जानी है। पोषण वाटिका में सब्जियों और फलदार पौधे लगाए जाएंगे। इनका देखभाल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करेंगी। पौधे और बीज विभाग उपलब्ध कराएगा। लगभग छह माह पूर्व तैयार कार्ययोजना के मुताबिक जिले में 200 पोषण वाटिका स्थापित करने के लिए केंद्रों को चिह्नित किया गया है। इनमें डुमरियागंज, 24, नौगढ़ में 12, बर्डपुर में सात, बांसी में 19, बढ़नी में 14, भनवापुर में 18, इटवा में 16, जोगिया में 10, खेसरहा में 14, खुनियांव में 18, मिठवल में 21, शोहरतगढ़ में 10, उसका बाजार में 12, लोटन में पांच वाटिका शामिल हैं। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से जारी प्रगति पुस्तिका में किसी भी केंद्र पर पौधरोपण का कार्य नहीं हो सका है। एक वाटिका पर 13,500 रुपये खर्च होने हैं। इस बाबत सीडीओ पुलकित गर्ग ने कहा कि पोषण वाटिका में शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के लिए विभागीय अधिकारी से जानकारी लेंगे। जिस स्तर पर शिथिलता मिलेगी, संबंधित को कार्य में तेजी लाने की हिदायत देंगे।
पौधरोपण में भी लापरवाही
जनपद के 200 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्थापित पोषण वाटिका में पौधरोपण का जिम्मा उद्यान विभाग के जिम्मे हैं। इस दिशा में विभाग के जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं। जिससे पोषण वाटिका स्थापित करने की मंशा तार-तार हो रही है। प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी पीएन राम का कहना है कि विभाग से धनराशि मिलने के बाद पौधरोपण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।