सिद्धार्थनगर। सिस्टम की लापरवाही से बाढ़ में फसल गवांकर मुआवजा के लिए डेढ़ साल से भटककर थक चुके उन 20 हजार किसानों के लिए खुशखबरी है। राजस्व और कृषि विभाग की नुकसान के रिपोर्टिंग में हुई गड़बड़ी की वजह से शासन से मिली धनराशि वापस हो गई थी। शासन के निर्देश पर बैंक खाता सहित अन्य त्रुटियों को सही कराया गया। अब 10.6 करोड़ मुआवजा राशि किसानों के बैंक खाते में भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
नेपाल सीमा से सटे जनपद सिद्धार्थनगर की गिनती प्रदेश तराई क्षेत्र के जिलों में की जाती है। यहां का 68 किलोमीटर सीमा नेपाल से लगता है। जिले 85 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है। दो लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि कृषि योग्य है। जिस पर गेहूं और धान की खेती होती है। इसमें गेहूं की फसल में किसानों को नुकसान नहीं झेलना पड़ता है। मगर धान की खेती हर साल बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। कारण जनपद नेपाल सीमा से सटा होने के कारण पहाड़ पर बारिश के बाद जिले में अगर कम बारिश हो तब भी बाढ़ के हालात उत्पन्न हो जाते हैं। वहां से पानी छोड़े जाने के बाद नदियां उफान पर आती हैं और फसल समेट ले जाती हैं।
शोहरतगढ़, नौगढ़, डुमरियागंज, इटवा और बांसी कमोबेश सभी तहसीलें बाढ़ से प्रभावित रही हैं। वर्ष 2022 में अक्तूबर में आई बाढ़ में जनपद का हर हिस्सा प्रभावित हुआ और फसल चौपट हो गई थी। इसमें फसलों का बीमा कराने वाले किसानों से प्रशासन की ओर से दावे की अपील की गई थी। जिससे उन्हें मुआवजा मिल सके। बाढ़ की त्रासदी 35514 हेक्टेयर भूमि पर लगी धान की फसल को निगल गई। इस तबाही में 66 हजार से अधिक किसान प्रभावित थे।
जिले के पांचों तहसील के किसान बाढ़ की तबाही के शिकार हुए थे। सरकार और बीमा कंपनियों की ओर से सर्वे किया गया था। जांच में 40 हजार किसान मुआवजे के दायरे में आए थे। जिसमें 19 हजार किसानों को पहले मुआवजा मिल चुका था। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण बड़ी संख्या में किसान वंचित हो गए थे। धनराशि आने के बाद वापस हो गई थी। शासन के निर्देश पर दोबारा किसानों का डाटा सही किया गया। 20958 किसानों को 10.6 करोड़ मुआजवा राशि देने की प्रक्रिया शुरू हो रही है।
इतना रकबा हुआ था बाढ़ से तबाह
आंकड़ों के मुताबिक शोहरतगढ़, नौगढ़, इटवा, डुमरियागंज और बांसी तहसील क्षेत्र में 35514 हेक्टेयर फसल बाढ़ से नष्ट हुई थी। इसमें 66340 किसान बाढ़ से प्रभावित हुए थे।
इतनी तय की गई है सीमा
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अधिकतम एक किसान को दो हेक्टेयर जोत का मुआवजा देना है। अगर किसी किसान का उसे अधिक प्रभावित हुआ है, तब भी उसे दो हेक्टेयर का ही लाभ मिलना है। उससे कम जोत वाले को रकबे के अनुसार मुआवजा दिया गया है। इसमें एक हेक्टेयर पर 13.500 रुपये मुआवजा राशि दी गई है।
पैदावार पर तय है बीमा राशि
कृषि विभाग मुताबिक मुआवजा राशि किसानों के फसल उत्पादन पर निर्भर है, जिस क्षेत्र में जैसा उत्पादन हुआ था। उसी प्रकार से मुआवजा राशि बनाई जाती है। इसमें बीघा और हेक्टेयर के हिसाब से धनराशि पहले से निर्धारित नहीं होता है। उत्पादन के हिसाब से राशि तय की जाएगी। इसके बाद रकबे के आधार पर कितना बनता है उसी हिसाब से किसानों खाते में राशि भेजी जाएगी।
इस तहसील के इतने किसानों को मुआवजा
तहसील किसानों की संख्या
नौगढ़ - 4243
बांसी - 4501
डुमरियाागंज - 5486
इटवा - 3380
शोहरतगढ़- 3348
इन गड़बड़ियों से अटक गई थी धनराशि
खतौन में गड़बड़ी, आधार नंबर और खाता नंबर में गड़बड़ी, नाम में गड़बड़ी और खाते की ईकेवाईसी और अन्य त्रुटियों के कारण मुआवजा राशि रुक गई थी। अगर उसी समय ध्यान दिया गया होता तो यह समस्या नहीं आती।,
बाढ़ से जिन किसानों की फसल नष्ट हो गई थी उनके बैंक खाते में मुआवजा राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे अब तक मुआवजे से वंचित रहे 20 हजार से अधिक किसानों को लाभ मिलेगा।
-पवन अग्रवाल, जिलाधिकारी