सिद्धार्थनगर। दो दिन पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में अस्पताल में होने वाली मौत पर शव को सम्मान के साथ घर भेजने का निर्देश दिया था। 48 घंटे में ही इस निर्देश की धज्जियां उड़ गई हैं। जिला अस्पताल में जिम्मेदारों की संवेदनहीनता शनिवार को खुलकर सामने आई। गोद में नवजात का शव लेकर महिला काफी देर तक परिसर में भटकती रही। शव को घर ले जाने के लिए जिम्मेदारों से गिड़गिड़ाती रही, लेकिन वह टालमटोल करते रहे। बाद में मीडियाकर्मियों तक मामला पहुंचने के बाद नींद से जागे जिम्मेदारों ने आनन-फानन में शव वाहन से शव को घर भेजवाया।
मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के उड़वलिया गांव निवासी रमेश की पत्नी किरन ने चार दिन पूर्व अपने घर पर ही बच्चे को जन्म दिया था। उसके पति व ससुर रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते हैं। सास इसलावती ने बताया कि शुक्रवार की शाम बच्चे की हालत अचानक बिगड़ गई। आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने एसएनसीयू (स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट) वार्ड में भर्ती कराया। सुबह करीब साढ़े 10.30 बजे बच्चे ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चे को जॉइंडिस और फेफड़े में संक्रमण था। इस संबंध में सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय ने कहा कि शव वाहन अस्पताल में है। सुविधा मांगने के बाद शव को घर तक भेजवाया जाता है। जैसे ही मामला संज्ञान में आया, तत्काल महिला को नवजात के शव के साथ गांव भेजवाया गया।