सिद्धार्थनगर। 19 दिन बाद जब बेटे के कातिलों पर हत्या का केस दर्ज हुआ तो पिता जयकरन ने बेटे की चिता को मुखाग्नि दी और बोला कि अब हमें न्याय मिला है। 90 वर्षीय बूढ़े पिता को बिलखता देख पूरा गांव रो पड़ा। इतने दिन बाद शव को घर से कुछ दूर बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे मिट्टी के अंदर सुरक्षित दबाकर रखे शव को अंतिम संस्कार के लिए निकाला गया, जिसे देखने के लिए मौके पर सैकड़ों लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों ने ‘अमर उजाला’ को धन्यवाद दिया।
बता दें कि जोगिया कोतवाली क्षेत्र के हरैया गांव निवासी लवकुश का शव मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के तिघरा गांव के सीवान में फंदे से लटकती हुई मिली थी। परिजनों ने पत्नी, साढू़ व तीन सालों पर हत्या कर शव को फंदे पर लटका देने का आरोप लगाया था। मगर इस मामले में मिश्रौलिया पुलिस ने लापरवाही करते हुए हत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया। मामले से नाराज परिजनों ने न्याय न मिलने तक शव को न जलाने का निर्णय लिया। इसके बादर कई उच्चाधिकारियों से भी मिले, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
मामला जब अमर उजाला टीम के संज्ञान मेें आया तो 24 मई के अंक में 17 दिन शव को घर में रखा शीर्षक से खबर प्रकाशित किया। इसके बाद आनन-फानन मेें पुलिस ने हत्या के लिए उकसाने की धारा में बदलाव करते हुए मुकदमें को हत्या में बदल दिया। मामले से संतुष्ट होने के बाद शनिवार की शाम चार बजे शव को कब्र से निकालकर विधि विधान के साथ अंतिम संस्कार किया। इस दौरान मृतक का भाई छट्ठू, रामनरेश, प्रधान सरोज शुक्ला, सुभाष, मुंशी, त्रिवेनी, ओमप्रकाश आदि मौजूद रहे।