बर्डपुर (सिद्धार्थनगर)। ब्लॉक क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों की हालत दयनीय है। अधिकांश विद्यालय के भवन जर्जर स्थिति में है। बारिश में छत से पानी टपकना आम बात है। फर्श टूट गए हैं। हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं। एमडीएम लेने के बाद बच्चे पेयजल के लिए घर वापस जाते हैं। शौचालय ध्वस्त हो गए हैं। बाउंड्री टूटी होने से परिसर असुरक्षित हो गए हैं। तालाब के पास स्थापित विद्यालयों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। बीआरसी के अंतर्गत कुल 100 प्राथमिक व 41 पूर्व माध्यमिक विद्यालय संचालित होते है।
डीएम कुणाल सिल्कू ने डीपीआरओ व बीएसए को निर्देश दिया था। इनमें पेयजल, स्वच्छता व बाउंड्री निर्माण को कहा गया था। दो माह के बाद भी विभाग अभी तक स्कूलों के हैंडपंपों को ठीक नहीं करा सका। बीईओ गोपाल मिश्र कहते है कि हैंडपंप की मरम्मत कराना ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है। कई विद्यालय के भवन जर्जर हैं। शौचालय व दीवार ठीक कराने के लिए विभाग से पत्राचार भी किया गया है। शासन से मद मिलने के बाद जल्द मरम्मत कराया जाएगा।
केस: एक
एक साल पूर्व ढही दीवार नहीं बनी
बर्डपुर के ग्राम पंचायत चकईजोत स्थित प्राथमिक विद्यालय मिश्रौलिया में मई 2016 में आए आंधी से विद्यालय की दीवार गिर गई थी। विद्यालय का फर्श टूटा है। तत्कालीन सीडीओ अखिलेश तिवारी ने निरीक्षण के बाद ग्राम पंचायत को निर्देशित किया था कि जल्द मरम्मत कार्य कराया जाए, लेकिन कार्य नहीं कराया गया। उधर, ग्राम पंचायत बर्डपुर नंबर 13 के प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय बसावनपुर में एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं, लेकिन दीवार नहीं होने से असुरक्षित हैं। विद्यालय के कमरों की खिड़की को चोर उखाड़ ले गए हैं।
केस: दो
निष्प्रयोज्य है स्कूल का शौचालय
बर्डपुर के ग्राम पंचायत बूड़ा में पूर्व माध्यमिक विद्यालय का शौचालय ध्वस्त हो गया है। झाड़ी होने के कारण निष्प्रयोज्य घोषित होने के कगार पर है। विद्यालय में छात्र-छात्राओं के साथ महिला अध्यापक भी तैनात है। सभी को नित्य क्रिया के लिए बाहर का रास्ता देखना पड़ता है।
केस: तीन
दूषित पानी पी रहे नौनिहाल
ग्राम पंचायत पिपरसन के प्राथमिक विद्यालय में लगा हैंडपंप रिबोर न होने के कारण दूषित पानी दे रहा है। दीवाल भी नहीं बनी है। शिक्षक पढ़ाई के साथ बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते है।
केस: चार
मुख्य भवन डेड, अतिरिक्त कक्ष में पढ़ाई
ग्राम पंचायत बर्डपुर नंबर दस के प्राथमिक विद्यालय देवरा चौधरी में ढाई सौ बच्चों का पंजीकरण हुआ है। मुख्य भवन कई साल पहले निष्प्रयोज्य घोषित किया जा चुका है। अतिरिक्त कक्ष में पढ़ाई कार्य हो रहा है। छोटे से कमरे में बच्चों को पढ़ाई में असुविधा हो रही है।