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दो साल से नहीं है पशुओं का एंटी रैबिज इंजेक्शन

Mon, 01 Apr 2019 10:44 PM IST
brijesh kumar ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
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इंजेक्शन - फोटो : डेमो फोटो
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सिद्धार्थनगर। जिले में दो साल से पशुओं को लगने वाला एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं है। इसकी वजह से पशु पालक बाहर से पशुओं को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को होती है। वहीं प्राइवेट क्लीनिक पर भी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन लोगों को मुख्यालय या फिर तहसील मुख्यालय जाना पड़ रहा है।
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प्रदेश की योगी सरकार पशुओं की सेहत और सुरक्षा को लेकर बेहद गंभीर है। यही वजह है कि छुट्टा पशुओं से निजात के लिए सरकार ने जिले भर में अस्थाई गोशाला का निर्माण कराना शुरू किया है, लेकिन पशुओं की देखरेख के लिए जैसे इंतजाम होने चाहिए थे, वह अब तक प्रशासन नहीं कर सका है। इस बीच सबसे बड़ी समस्या पशुओं को लगने वाले एंटी रैबीज इंजेक्शन की हो गई है। जिले में पिछले दो सालों से एंटी रैबीज इंजेक्शन किसी भी पशु केंद्र पर नहीं है। इस वजह से पशुपालक 135 से 150 रुपये खर्च कर इंजेक्शन लगवा रहे हैं। इससे पशुओं पर रुपये का भार तो पड़ ही रहा है। साथ ही उन्हें खरीदने के लिए मुख्यालय या तहसील मुख्यालय आना पड़ रहा है। पशुपालक महेंद्र यादव, रामसुमेर, सुखई, सुखराम और मोल्हू आदि ने बताया कि पिछले दो सालों से एंटी रैबीज इंजेक्शन केंद्रों पर उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह से काफी परेशानी होती है।
बताया कि गाय के बछड़े व बछिया को अक्सर कुत्ते झुंड में काट लेते हैं। अगर सही समय पर इंजेक्शन न लगवा जाए तो पशुओं की मौत भी हो सकती है। साथ ही अन्य पशु भी उसकी चपेट में आ सकते है। यही वजह है हर साल पशुओं को बाहर से 150 रुपये में खरीदकर इंजेक्शन लगवाना पड़ता है। वही विभागीय सूत्रों की माने तो अस्थाई गोशाला में जितने भी पशु है, उसमें से 90 प्रतिशत पशुओं को एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं लगा है। इसकी वजह से करीब आधा दर्जन पशुओं की मौत भी हुई है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ज्ञान प्रकाश ने बताया कि इंजेक्शन न होने की जानकारी नहीं थी। अगर ऐसा है तो मामले को दिखवाते हुए जल्द ही एंटी रैबीज इंजेक्शन मंगवाया जाएगा।
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