जिला पंचायत की ओर से बनवाया गया शौचालय
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सिद्धार्थनगर। अध्यक्ष की कुर्सी के विवाद में जिला पंचायत मुखियाविहीन हो चुका है। इसका असर जहां विकास कार्यों पर पड़ रहा है, वहीं इसके चलते जिला पंचायत के 54 कर्मचारियों का दो माह से वेतन रुका पड़ा है। वित्तीय अनियमितता के आरोप में प्रशासन ने अध्यक्ष के पावर को सीज करते हुए त्रिस्तरीय कमेटी गठित कर दी थी। इसके बाद कोर्ट ने इस फैसले को निरस्त कर डीएम से जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। हालांकि इस पर अब तक कोई फैसला नहीं हो सका है।
जिला पंचायत के तरफ से कराए गए कार्यों की जांच में अनियमितता पाए जाने पर प्रशासन ने आठ मार्च को अध्यक्ष का पॉवर सीज करते हुए कार्यों के सुचारू संचालन के लिए त्रिस्तरीय कमेटी गठित कर नौ मार्च को कार्यभार भी ग्रहण करा दिया। इसके बाद प्रशासन के फैसले के विरोध में जिला पंचायत अध्यक्ष गरीबदास ने हाईकोर्ट की लखनऊ बैंच में अपील की।
हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल को प्रशासन के फैसले को निरस्त करते हुए डीएम को फिर से वित्तीय अनियमितता के मामले की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। इस बीच लोकसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लगने के कारण इस मामले में आगे की कार्रवाई नहीं हो सकी। इस कारण जिला पंचायत मुखियाविहीन हो गया है। इसका असर जहां जिला पंचायत की तरफ से कराए जाने वाले विकास कार्यों पर पड़ रहा है, वहीं इसके चलते जिला पंचायत के कर्मचारियों का वेतन भी दो माह से रुका है। अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत हरिओम नारायन चंद का कहना है कि मामला न्यायालय और शासन स्तर का है। ऐसे में मेरी तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जानी है। न्यायालय और शासन से जो फैसला आएगा। उसका पालन किया जाएगा।