परसा में एसएसबी के जवानों ने रक्तदान कर महिला की बचाई जान।
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परसा। एसएसबी 50वीं वाहिनी के जवानों ने शनिवार को दो महिलाओं को रक्त देकर उनका जीवन बचा लिया। दोनों महिलाओं को खून की कमी थी। इस कारण उनकी जिंदगी खतरे में थी। जवानों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, उन्होंने तत्काल खून दिया और दोनों महिलाओं की जिंदगी बचा ली। एसएसबी जवानों के इस कार्य को क्षेत्र के लोग सराहना कर रहे हैं।
शोहरतगढ़ क्षेत्र के बसंतपुर गांव की रहने वाली गर्भवती महिला समशुन्निशा पुत्री असीबुल्लाह की अचानक तबीयत खराब हो गई और परिजन उसे इलाज के लिए सीएचसी शोहरतगढ़ ले गए। जहां चिकित्सकों ने तीन यूनिट खून की कमी बताते हुए रक्त की व्यवस्था करने को कहा। यह बात सुनकर परिजन परेशान हो गए। काफी दौड़ भाग किए, लेकिन रक्त उपलब्ध नहीं हो पाया। किसी तरह इस बात की जानकारी एसएसबी 50वीं वाहिनी के सेनानायक आगम दयाल को हुई। उन्होंने तत्काल कमांडर वरुण कुमार को निर्देश दिया। निर्देश मिलते ही एसएसबी 50वीं वाहिनी के जवान कमांडर वरुण कुमार के नेतृत्व में जवान चंदन सिंह, राजाराम भिंचर, माहासीन आलम व संजय शर्मा सीएचसी शोहरतगढ़ पहुंचे। तीन जवानों ने एक-एक यूनिट खून देकर समशुन्निशा की जान बचाई। इस बीच जवानों को एक और महिला के बीमार होने की जानकारी मिली। उन्होंने चिल्हिया थाना क्षेत्र के महदेवा निवासिनी निशा देवी पत्नी संजय कुमार को भी एक यूनिट खून दिया। जवानों के इस काम की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है।
परिजन करने लगे थे आनाकानी
समशुन्निशा की तबीयत खराब होने पर जब डॉक्टर ने खून का इंतजाम करने को कहा, तो परिजनों ने रिश्तेदारों से लेकर अपने सगे-संबंधियों को रक्त देने के लिए कहा। लेकिन कोई भी रक्त देने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस पर समुशन्निशा परेशान हो गई। लेकिन जवानों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, वह तत्काल खून देने के लिए तैयार हो गए।
मिट गई जातीयता की दूरी
रक्त देने में कोई भी जातीयता काम नहीं आती है। यह एसएसबी जवानों ने दिखा दिया। बिना किसी हिचक के और बिना कोई जाति पाति पूछे चारों जवानों ने रक्त देकर समाज को यह बताने की कोशिश की है कि जातीयता से पहले मानव धर्म है।