फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी. के भवन निर्माण कार्य ठप

विज्ञापन
विज्ञापन
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के भवन निर्माण का कार्य ठप हो चुका है। धनराशि न मिलने से कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने कार्य को निरंतर जारी रख पाने में असमर्थता जताई है। संस्था ने कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए तत्काल 20 करोड़ रुपये की मांग की है। उधर, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने धनराशि देने से पहले अब तक हुए कार्यों के सत्यापन का निर्देश दिया है। इसके लिए आवंटित धनराशि और उसके अनुरूप कराए गए कार्यों का पूरा ब्यौरा तलब किया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि जब तक इसका संपूर्ण विवरण उपलब्ध नहीं होता, आगे की धनराशि फिलहाल नहीं दी जाएगी।
विज्ञापन

वर्ष-2014 से सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी का निर्माण शुरू हुआ था। कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम को अबतक कुल लागत की करीब 60 फीसदी धनराशि छह किश्तों में 152 करोड़ रुपये दी जा चुकी है। इस राशि से प्रशासनिक भवन, कुलपति आवास, शिक्षक आवास, कला संकाय का निर्माण ही जैसे-तैसे पूरा हो सका है। विज्ञान संकाय, छात्र-छात्राओं के हॉस्टल, शिक्षकों के टाइप-5 आवास सहित अन्य कई जरूरी भवन अधूरे हैं। पिछले चार माह से निर्माण कार्य लगभग ठप हो गया है। हॉस्टल न बनने से जहां दूर-दराज के विद्यार्थियों को भटकना पड़ रहा है वहीं कर्मचारी-शिक्षक भी तमाम दुश्वारियों से जूझ रहे हैं। संकाय भवनों का निर्माण पूरा न होने से नई कक्षाओं का संचालन अटका हुआ है। हाल ही में शासन ने यूनिवर्सिटी को 20 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त की है। इसकी भनक लगते ही निर्माण निगम ने यूनिवर्सिटी को 20 करोड़ की मांग भेज दी है। दलील दी है कि कार्य की निरंतरता को जारी रखने के लिए इस धनराशि की जरूरत होगी।
मांग पत्र मिलने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने संस्था से अब तक कराए गए कार्यों का ब्यौरा तलब किया है। यूनिवर्सिटी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि छह किश्तों में 152 करोड़ रुपये दिए गए हैं, इस धनराशि से कितना और कहां-कहां काम कराया गया है, पूरा विवरण शीघ्र उपलब्ध कराया जाए। सत्यापन के बाद ही धनराशि जारी हो सकेगी। निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर डीपी सिंह ने बताया कि संस्था ने सीमित संसाधनों के बावजूद लगातार काम करती रही है। धन की अति आवश्यकता को देखते हुए मांग की गई है। पैसा प्राप्त होने पर ही कार्य को निरंतर जारी रखा जा सकेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें