जिला आस्पताल का बंद पड़ा पैथालोजी।
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सिद्धार्थनगर। संयुक्त जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में आने वाले मरीजों की जांच की सुविधा है, पर लंबे समय से ताला खुला ही नहीं है। लिहाजा शुगर समेत अन्य तात्कालिक जांच के लिए तीमारदारों को बाहर प्राइवेट पैथॉलाजी जाना पड़ता है। लैब कभी खुलता ही नहीं।
जिला चिकित्सालय के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने वाले मरीजों का तत्काल जरूरत पड़ने वाली जांच की सुविधा सरकार की ओर से की गई है। इसके अनुपालन में जिला अस्पताल प्रशासन ने एक कमरे में इमरजेंसी पैथॉलाजी के संचालन की पहल भी की है। इस व्यवस्था के बाद भी गंभीर मरीजों को शुगर समेत अन्य तात्कालिक जांच नहीं हो पा रही है। इसके लिए मरीजों के साथ तीमारदारों को दलालों के चंगुल में फंसकर बाहर प्राइवेट पैथॉलाजी पर भारी भरकम धन खर्च करने की मजबूरी हो गई है।
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में स्थापित लैब का ताला कब खुला था, शायद ही किसी को पता हो। भीतर व्याप्त गंदगी से स्वत: प्रमाणित हो जाएगा कि किसी मरीज की जांच करना दूर की बात, खुलता ही नहीं है। ऐसा भी नहीं कि संचालन के लिए स्वास्थ्य कर्मियों की ड्यूटी न लगाई गई हो। इसके बाद भी ड्यूटी में लगे कर्मियों की लापरवाही जारी है। इमरजेंसी आने वाले मरीजों के लिए उनके जीवन में वरदान साबित होने वाले इमरजेंसी पैथालोजी का न खुलना मरीजों को काफी अखर रहा है। संयुक्त जिला चिकित्सालय की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रोचस्मति पांडेय का कहना है कि लैब संचालन के लिए कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके बाद भी बंद पड़ा रहना गंभीर बात है। मरीजों की जांच न होने का मामला संज्ञान में आया है। संबंधित कर्मियों से जवाब-तलब करते हुए संचालन की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएंगे।